Saturday, December 9, 2017

The Blind Game

#_Trailer
#_Coming_Up_Next

                       द ब्लाइंड गेम
Las Vegas,
14:05 am

लास वेगस, अमेरिका का वो शहर जहाँ दिन हो या रात यगर यहाँ जिन्दगी की रफ्तार नहीं थमती।
आधी रात के बाद भी शहर की सड़कों पर दौड़ती कारें और बाइक ये बताने के लिए काफी थे कि शहर अभी भी जाग रहा था।
हालांकि कई कारें और बाइक्स पूरी रफ्तार से सड़क पर दौड़ रहीं थी फिर भी वहां का माहौल शांत लग रहा था ऐसा शायद इसी वजह से था कि लगभग इतनी ही ट्रैफिक यहां हमेशा मौजूद होती थी।
हर चालीस कदम पर लगी स्ट्रीट लाइट्स के नारंगी प्रकाश में नहाई हुई बाॅस्टन रोड का नजारा बेहद रंगीन और खुशमिजाज नजर आ रहा था।
बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स के बीच कुछ ज्वेलरी शाॅप और एक-दो स्टोर्स अभी भी खुले थे।
वहीं कुछ दूरी पर खड़ी होटल पैराडाइज की गगनचुंबी ईमारत उस खुशनुमा माहौल को और भी विस्मयकारी बना रही थी।
हालांकि जलते हुए स्ट्रीट लाइटों और लोकल स्टोर्स की लाइटों की वजह से रात इतनी भयंकर नहीं लग रही थी जितनी की असल में थी फिर भी महौल में एक अजीब सा पैना सन्नाटा पसरा था।
फुटपाथ पे चल रहे लोगों और कुछ भिखारियों को वक्त की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी।
हर तरफ शांति और सुकून था।
और तभी अचानक होटल पैराडाइज के पार्किंग लाॅट से एक ब्लैक पार्च्यूनर बेहद तेजी से निकली और जबर्दस्त तेजी के साथ दांयी तरफ घूम गई।
पूरे वातावरण में टायरों की चरमराहट गूंज उठी और सहसा सबकी नजरें उसी कार की दिशा में घूम गई मगर चूँकि कार के काले शीशी चढ़े हुए थे इसलिए अंदर कौन या कितने लोग थे ये कह पाना बहुत ही मुश्किल था हाँ मगर इतना जरूर कहा जा सकता था कि कार के अंदर ड्राइविंग सीट पर बैठे शख्स को मौत की परवाह नहीं थी।
ना तो अपनी और न ही फुटपाथ पर चल रहे लोगों की।
कार तेजी से सड़क पर किसी सांप की तरह लहराती हुई दौड़ रही थी शायद उसकी वजह पीछे आने वाली चार कारें थीं।
चारों कारें उस ब्लैक पार्च्यूनर के पीछे बेहद तेजी से निकलीं शायद वे लोग उस पार्च्यूनर के अंदर बैठे लोगों के पीछा कर रहे थे और शायद उनका इरादा उस पार्च्यूनर में सवार शख्स या लोगों को जिंदा छोड़ने का बिल्कुल भी नहीं था।
क्योंकि पीछे की कारों की खिड़कियों से कुछ रसियन आदमी जो शक्ल और सूरत से ही बेहद खतरनाक और खूंखार नजर आ रहे थे, पार्च्यूनर पर बेतहाशा गोलियाँ बरसा रहे थे वो भी आॅटोमेटिक हाईटेक गन्स से।
नतीजतन कुछ मिनट में ही पार्च्यूनर की पिछली खिड़कियों पर कई गोलियों के छेद थे पर ऐसा लग रहा था पार्च्यूनर में मौजूद शख्स अभी भी जिन्दा था और बेतहाशा कार दौडा़ रहा था.... Wait For Full Story

                                       Written By
                           Manish Pandey'Rudra'

©manish/pandey/09-12-2017

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