Wednesday, February 7, 2018

Adhoore Panne@Zindgi

                 अधूरे पन्ने@जिंदगी
            (अधूरे इश्क़ की पूरी कहानी)

                      अध्याय-चार
                होमसाइंस की लड़की

बीते दिनों हुई घटना से उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था सिवाय इसके कि अब ध्रुव के क्लास की लड़कियाँ और कुछ लड़के मौका मिलते ही उस पर व्यंग्य करते थे और और उसका मजाक बनाते थे।
क्लास में घुसने से पहले ही उसकी नज़र एक कोने में खड़ी कुछ लड़कियों, जिनमें वीर की गर्लफ्रेंड रश्मि भी थी, तृप्ति, रजनी और उनके सामने बेंच पर बैठे रोहित और अमित पर पड़ी जो उनके साथ किसी गहरी चर्चा में डूबे हुए थे।लेकिन उन्होंने उसे नहीं देखा और जब उन लोगों की बातें उसके कानों में पड़ीं तो वह रुक गया और खिड़की के पीछे खड़ा होकर उनकी बातें सुनने लगा।
"सच कहूं तो मुझे तो वो शुरू से ही अजीब लगता था।"
रश्मि ने कहा जिसका उसकी फ्रैंड तृप्ति ने बखूबी समर्थन किया।
"और मुझे तो वो शुरू से ही पसंद नहीं था!"
तृप्ति ने भी नाक-भौं सिकोड़कर उसका मखौल उड़ाते हुए ऐसे कहा जैसे वो कोई बदबूदार कीड़ा हो।
"हाँ!क्योंकि उसने तुम्हें कभी भाव नहीं दिया इसीलिए!"
आकांक्षा ने अपनी किताब से सिर उठाते हुए तृप्ति को जवाब दिया और हिकारत से भरे तृप्ति के चेहरे पर से नजरें हटाकर वापस उसने अपनी नजरें कापी पर गडा़ लीं।हालांकि ध्रुव ने कभी भी उससे बात करने की कोशिश नहीं की थी लेकिन फिर भी आज उसका जवाब सुनकर ध्रुव के मन में उसके लिए असीम श्रद्धा उमड़ पड़ी।
"हुंह!मुझे तो लगता है उसने सच में इलेवन्थ की उस लड़की को छेड़ा था और इसीलिए उसे सजा मिली।उसके साथ यही होना चाहिए था।"
तृप्ति ने फिर से कहा।
"वो एक नम्बर का कमीना है!"
रोहित ने उसका साथ दिया और एक बार फिर ध्रुव के मन में उन दोनों के लिए जबर्दस्त नफरत का भाव उमड़ आया।इसी बात पर आकांक्षा को छोड़कर बाकी सभी बुदबुदाते हुए आपस में बातें करने लगे।
और जब ध्रुव के लिए जब इससे ज्यादा बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो गया तो वो खिड़की के पीछे से निकल कर बाहर आ गया और बेहद गुस्से में पहली लाइन को छोड़कर जिसमें लड़कियाँ बैठती थीं आगे बढ़ गया और दूसरी लाइन में पीछे से दूसरी बेंच पर उसने अपना बैग पटक दिया।
उधर क्लास में पहले से मौजूद हर लड़के-लड़की के चेहरे का रंग उड़ गया था जबकि आकांक्षा मुस्कुरा रही थी।
"हाय!"
ध्रुव ने आकांक्षा की ओर हाथ हिलाकर कहा।
"हाय!"
आकांक्षा ने भी मुस्कुराते हुए उसका हाय का जवाब दिया और फिर ध्रुव क्लास से बाहर निकल कर मैदान की ओर निकल गया जहाँ उसके कई दोस्त पहले से ही मौजूद थे।
खैर इसके बाद ध्रुव जहाँ भी जाता था लोगों की भीड़ उसे बुदबुदाहट भरे स्वर में बातें करती या आपस में कानाफूसी करती मिल ही जाती थी और उसे इस बात से काफी चिढ़ महसूस होती थी।
"छोड़ो बे इन बातों पर ध्यान मत दे कुछ दिनों में ये लोग सबकुछ भूल जायेंगे!"
प्रेयर के लिए साथ जाते हुए प्रद्युम्न ने उसे समझाने की कोशिश की।
"लेकिन..."
ध्रुव ने दांत पीसकर कुछ कहने की कोशिश की पर सामने से आती हुई इति और उसकी सहेलियों को देखकर चुप हो गया और आगे से उठकर पीछे जय और प्रद्युम्न के पास खड़ा हो गया।
"तुम टेंशन  न लो भाई सब सेट हो जायेगा अच्छा चलो आज खाली पीरियड में तुम्हें अपनी लवस्टोरी सुनाऊँगा।"
देवांश ने कहा और इसके बाद दुखी मन से वो बाकी लोगों से बातें करने लगा।
खैर हर दिन की तरह प्रेयर के बाद आज भी हेडमास्टर उपाध्याय सर ने उन्हें पढ़ाई और इसके महत्व को लेकर लम्बा-चौड़ा लेक्चर दिया।
"क्या बताएं कैसे-कैसे गधे लड़के पढ़ते हैं यहाँ अभी कल शाम को विद्यालय के दो लड़के यहीं परिसर मैं बैठे गुठखा खाकर उद्यान के पौधे पर थूक रहे थे"
उन्होंने हाॅल के बगल लगे कुछ पौधों की एक नर्सरी की ओर इशारा करते हुए कहा।
"और तभी हमने उन्हें देख लिया और उन्हीं से साफ करवाया लेकिन इतने विध्वंसक प्रकृति के बच्चे हैं कि आज सुबह जब मैं आया तो देखा उन्होंने पूरा पौधा ही उखाड़ दिया था।"
हेडमास्टर जी ने यह बात गहरे अफसोस के साथ व्यक्त की जबकि वहां मौजूद सारे टीचर्स और स्टूडेंट्स जोरों से हँसने लगे और ध्रुव ने इति को भी खिलखिला कर हँसते हुए देखा और क्लास चेंज होने के बाद आज पहली बार वो भी खुलकर हँसा था।खासकर कि इसलिए क्योंकि वह घटना उसी के सामने हुई थी जब वो अपने दोस्तों के साथ अरविंद से मिलने हास्टल आया था और वे दो लड़के कोई और नहीं बल्कि देवांश और प्रतीक थे।
इसके बाद न जाने क्यों मगर अब उसका दिल हल्का हो गया था और अब उसे जरा भी फर्क नहीं पड़ता था कि लोग उसके पीठ पीछे क्या कानाफूसी करते थे।
"अरे मुझे तो अब भी समझ में नहीं आता है कि ऐसी प्रवृत्ति रखने वाले बच्चों को इस तरह ऊधम मचाकर मिलता क्या है।स्कूल की बेंचें तोड़ना, उद्यान के फूल और पौधों को नष्ट करना, सीढ़ियाँ पर कूद-फाँद मचाना, स्कूल में टॅायलेट होते हुए भी जनरेटर पर विसर्जन करना और शौचालय की दीवारों पर अभद्र वाक्य लिखना अरे भाई मुझे समझ में नहीं आता इससे इस प्रकार के बच्चों को क्या मजा मिल जाता है।"
हेडमास्टर उपाध्याय जी ने सिर हिलाकर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा जबकि ऐसे कामों में उनका खुद का बेटा आकर्षित सबसे आगे रहता था जो इस समय रजत के साथ बैठा मुस्कुरा रहा था।खैर इसी तरह की और भी बातें बताकर हेडमास्टर जी ने उन्हें छोड़ दिया।
"व्ही!अब अच्छा लग रहा है!"
उसने होंठों से व्हिसल बजाते हुए कहा।
"मैंनें कहा था न ज्यादा टेंशन मत पालो।"
जय ने उसका कंधा थपथपाते हुए कहा और फिर दोबारा किसी मैग्जीन का क्रासवर्ड साॅल्व करने लगा।
"तुम मुझे कुछ बताने वाले थे!"
ध्रुव ने आराध्या और प्रद्युम्न पर से नजरें हटाकर देवांश की ओर मुड़ते हुए कहा।
"ओह हाँ!"
देवांश ने खुशी से मुस्कुराते हुए कहा।
"मैं तुम्हें अपनी लव स्टोरी सुनाने वाला था।"
उसकी बात सुनकर प्रतीक, विराट और उत्कर्ष उसके पास खिसक आये जबकि उत्कर्ष अभी भी कनखियों से तृप्ति की ओर देख रहा था।
"अर.... असल में ये सब पिछले साल शुरू हुआ जब हम फर्स्ट ईयर में थे और हमारी क्लास वहीं लगती थी जहाँ आजकल इति की क्लास है।"
ध्रुव दिलचस्पी से सुनता रहा जबकि बाकी सब मुस्कुरा रहे थे।देवांश ने अपनी कहानी जारी रखी।
"और हमारे क्लास के ठीक बगल होमसाइंस की क्लास चलती थी जिसमें सुबह और शाम दो पीरियड क्लास नाईन्थ की लड़कियाँ वीणा मैम से होमसाइंस पढ़ने आती थीं और उसमें मेरी वाली भी आती थी और उसका नाम था निशी जैसा कि मुझे बाद में पता चला।"
बोलते वक्त उसके कान सुर्ख होने लगे और वो मुस्कुराने लगा।
"लेकिन मुझसे पहले उसे....."
देवांश से पहले क्या ये ध्रुव नहीं सुन पाया।
"भाई!भाई!ध्रुव!"
ध्रुव ने मुड़कर देखा तो पाया प्रगति और शिवन्या उसे बुला रही थीं।
"क्या हुआ?"
चूंकि दीप्ति और आकांक्षा के अलावा बाकि लड़कियों से ज्यादा उसकी इन्हीं दोनों से बनती थी इसलिए उसने अपने गुस्से पर काबू करते हुए आराम से पूछा।
"भाई इति बाहर देखो!"
दोनों ने एकसाथ चिल्ला कर कोरस में कहा।
बेहद तेजी के साथ उसकी गर्दन बाहर की ओर घूम गई और चटाक की हल्की आवाज आई।
अपनी गर्दन सहलाते हुए उसने बाहर देखा तो पाया इति और उसकी एक क्लासमेट जिसका नाम उसे पक्का पता नहीं था पर शायद ये यज्ञिता थी।
खैर इति बुरी तरह रो रही थी उसके मोती जैसे आँसू उसके गालों पर से बहते हुए उसके होठों और गर्दन के नीचे जा रहे थे।जबकि सिर्फ ध्रुव ही नहीं उसके क्लास में मौजूद हर लड़के और लड़की की नजर बाहर उन्हीं पर टिकी थीं और इससे पहले कि कोई समझ पाता या कुछ बोलता वातावरण में तडा़क की जोरदार आवाज गूंज गई।और अगले ही पल अनुराधा मैम के मोटे-भारी हाथ इति के गाल पर छप चुके थे जिससे उसके गाल और भी बुरी तरह लाल हो गए।
"अर... वो पागल टीचर उसे मार क्यों रही है?"
ध्रुव ने तड़पते हुए कहा और फौरन उसके दिल में अनुराधा मैम के लिए भीषण गुस्से का लावा उबलने लगा।
उसने बिल्कुल भी नहीं सुना कि वे इति और उस दूसरी लड़की के बारे में क्या कह रही थीं बल्कि वो तो बस मन ही मन उन्हें बुरा-भला कह रहा था।
वो भागकर अपनी इति के पास जाना चाहता था और उसके सामने ही उसके नर्म गुलाबी गालों पर क्रूरता से पड़ने वाले हाथ को उखाड़ कर फेंक देना चाहता था पर वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता था।
इधर उसके चेहरे पर क्रोध का लावा दहक रहा था जबकि जय और बाकी सबके चेहरों पर जबरदस्त संतुष्टि का भाव दिख रहा था।
"वाह बहुत बढ़िया!"
अचानक ये शब्द वीर की जुबान से फिसल गए और ध्रुव ने उसे घूरकर देखा जिससे अचानक उसे खांसी आने लगी।
खैर इसके बाद टीचर ने यज्ञिता को भी एक थप्पड़ जड़ दिया और फिर इति की ओर पलटकर उन्होंने उसे मुँह धोकर क्लास में जाने को कहा।जिसके बाद इति वहीं बगल में लगे हैंडपंप के पानी से मुँह धुलने लगी और इस वक्त ध्रुव के दिल में उसके लिए बेहद प्यार उमड़ रहा था ओर ऐसा लग रहा था जैसे अभी रो पडे़गा।
वहीं इति के अपने क्लास में लौट जाने के बाद भी काफी देर तक तृप्ति और उसकी सहेलियाँ जैसे अंकिता, रश्मि, मधू और आराध्या उसे के बारे में चर्चा करती रहीं और इस बारे में कयास लगाती रहीं कि आखिर किस वजह से दोनों को मार पड़ी होगी।
खैर अंततः ध्रुव को उड़ती-उड़ती जो खबर मिली उससे उसका दिल बैठ गया।
"अर... वो दोनों एक दूसरे के ब्वॉयफ्रेंड के बारे में कुछ कह रही थीं जिसे लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया।"
ये बात ध्रुव को भरत ने बताई जो स्कूल कभी-कभार ही आता था।
"अर... पर उसका कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है!"
ये बात ध्रुव ने भरत से कम और खुद से ज्यादा कही थी।
"मुझे क्या करना है!"
कहने के बाद भरत कंधे उचका कर वापस चला गया जबकि ध्रुव के जेहन में एक बार फिर सैकड़ों सवाल कौंधने लगे।
इसके बाद पूरे दिन वो ज्यादा खुश नहीं रह पाया खैर छुट्टी के बाद एक बार दोबारा वो इति के पीछे-पीछे चलता रहा और आखिरकार जब इति एक संकरी गली में चली गई तो वो भी अपने घर की तरफ चल पड़ा।
अगले दिन स्कूल में उसने प्रेयर खत्म होने तक इति का इंतज़ार किया पर वह नहीं आई।
"अर... आज नहीं आई!"
ध्रुव ने आह भरते हुए कहा।
"किसे परवाह है!"
जय ने कहा जो ध्यान से किसी को देख रहा था हालांकि ध्रुव ने ध्यान से नहीं देखा पर इतना पक्का था कि वो कोई लड़की थी।
खैर अटेंडेंस लेने के बाद जब विजय सर फिजिक्स पढा़ने के लिए ब्लैकबोर्ड की ओर मुड़े तो फौरन उनका पारा गरम हो गया।दरअसल सामने ब्लैकबोर्ड पर किसी ने मोटे-मोटे अक्षरों में बड़ा सा अंग्रेजी का अल्फाबेट आई(I) और पी(P) बना दिया था।
"किस गधे ने ये गोदा है!"
उन्होंने पूरे क्लास को घूरते हुए कहा लेकिन सब एक दूसरे का चेहरा देखने लगे सिवाय ध्रुव के क्योंकि उसे पता था ये काम किसने किया था, उसीने और इसीलिए उसने सिर नीचे कर लिया था।
पिछले कुछ दिनों से वो हर जगह इति के नाम का पहले अक्षर गोदता रहता था।
और हालांकि उसके ज्यादातर फ्रैंड्स भी जानते ही थे कि यह काम उसी का था लेकिन फिर भी दोस्ती का फर्ज निभाते हुए किसी ने कुछ नही बोला।
लेकिन विजय सर ने अंदाजा लगा लिया था कि यह काम उसी का था इसीलिए उन्होंने लिखने वाले को खूब खरी-खोटी सुनाई।
"अरे गुरुजी छोड़ो अब!"
विराट ने उसका बचाव करते हुए कहा लेकिन विजय सर उसे ही हड़काने लगे और उसे बेवकूफ़, गधा और न जाने क्या-क्या कह दिया।
खैर इसके अलावा उस पीरियड में कोई और घटना नहीं घटी।उधर दूसरी तरफ प्रतीक क्लास के हर लड़के से पंजा लडा़ता था और हर बार हार जाता था।
"कुचल दे ध्रुव उसे!"
"मसल दे ध्रुव भाई!"
विनीत और प्रद्युम्न वीर के साथ मिलकर उसे चियर कर रहे थे जब वो पाँचवी बार प्रतीक से पंजा लडा़ रहा था।हालांकि दिखता तो नहीं था पर ध्रुव था काफी ताकतवर और जैसे ही उसने एक बार फिर हरा दिया दीप्ति, शिवन्या और प्रगति तीनों जोर-जोर से तालियाँ बजाने लगीं।
खैर अगले दिन प्रेयर के बाद से माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया जब प्रिंसिपल सर ने उन्हें अगले कुछ दिनों बाद होने वाले टेस्ट के बारे में बताया।
"बच्चों अक्टूबर के दूसरे सप्ताह यानी चार दिन बाद से ही आपका फर्स्ट मंथली टेस्ट होने वाला है और इसीलिए आपको अपने पठन-पाठन पर उचित समय जरूर देना चाहिए और हाँ टेस्ट खत्म होने के बाद विद्यालय का समय बदल दिया जायेगा और नया समय प्रातः नौ बजे से चार बजे तक का होगा।"
उन्होंने जैसे ही बोलना बंद किया फौरन बड़े हाॅल में कानाफूसी और बुदबुदाहट की आवाज़ दस गुना ज्यादा बढ़ गई।
खैर ध्रुव का मन टेस्ट की तैयारियों में नहीं लग रहा था और जैसा कि तय था उसके पूरे क्लास में सिर्फ तीन लड़के थे जिन्हें टेस्ट की परवाह थी और वे तीनों शोभित अरविंद और आदित्य थे।
अरविंद, शोभित और आदित्य तो दिनभर कापियां और किताबें लेकर रटते रहते थे जबकि बाकी सब उनका मजाक उड़ाया करते थे।
हालांकि ध्रुव ने बाद में थोड़ी बहुत पढ़ाई करने की कोशिश की लेकिन ज्यादातर वक्त वह सिर्फ इति के बारे में सोंचते हुए बिताता था।
खैर ध्रुव हल्की फुल्की तैयारी के साथ अगले दिन टेस्ट देने पहुंचे गया।
"भाई इति भी आ गई है!"
उत्कर्ष ने पहुँचते ही उसे बताया लेकिन ध्रुव ने बस सिर हिला दिया और चुपचाप बाकी दोस्तों से मिलने चल पड़ा।
"और शेर कैसी तैयारी है?"
प्रद्युम्न ने उसे देखते ही पूछा लेकिन उसने बस कंधे उचका दिये।
"यार मेरा तो एक चैप्टर पूरा ही छूट गया।"
शोभित ने अफसोस करहे हुए कहा जिसे सुनकर प्रद्युम्न, जय, विनीत, वीर और विराट बुरी तरह हँसने लगे।
"अबे साले तू एक चैप्टर के लिए मरा जा रहा है और मुझे यहां आकर पता चला कि आज फिजिक्स का पेपर है।और मैं कल रात भर से केमिकल रिएक्शन रट्टा मार रहा था!"
प्रद्युम्न की बात सुनकर ध्रुव मुस्कुराने लगा कम से कम उसने पिछले तीन दिन फिजिक्स के पेपर की ही तैयारी की थी।
"वो देख भाभी!"
वीर ने दूसरी तरफ इशारा करते हुए कहा और ध्रुव ने उधर नजरें घुमाईं।इति अपनी बेस्ट फ्रेंड शशि के साथ बातें करते हुए टहल रही थी और ध्रुव को यह देखकर तसल्ली मिली कि कम से कम वो खुश थी।
खैर इस बात से सिर्फ इतना फर्क पडा़ कि उसकी टेस्ट की टेंशन थोड़ी-थोड़ी कम हो गई।
"चल बेल बज गई!"
अरविंद के कहने के साथ ही वे चारों बड़े हाॅल की ओर बढ़ गये जबकि बाकी क्लासों के अधिकांश लड़के-लड़कियां वहां पहले से मौजूद थे।
"सब अपनी-अपनी क्लास की लाईन बनाकर खड़े हो जाएं दायीं ओर लड़कियों की लाइन बनेगी और बाईं ओर लड़कों की।"
इक्जामिनेशन इंचार्ज प्रमोद सर ने रौबदार आवाज में कहा जो सामान्य कद-काठी के और काफी गोरे रंगत वाले अनुशासनप्रिय और कठोर आदमी थे।
और कुछ ही देर में जैसा कि उन्होंने कहा था सभी लाईन में खड़े हो गये।
"क्या बे ये लोग तो दिमाख खराब कर रहे हैं!"
अमित ने खरखराती आवाज में कहा।
"अबे सबकी चेकिंग कर रहे हैं उधर देख!"
मोहन के बोलते ही ध्रुव के साथ बाकी सब भी सामने देखने लगे जहाँ एक तरफ हर क्लास के क्लास टीचर अपनी क्लास के बच्चों की तलाशी ले रहे थे जबकि सभी लड़कियों के पर्श वगैरह की तलाशी अनुराधा मैम और कविता मैम मिल कर ले रही थीं।
ध्रुव दोबारा अपनी लाइन की ओर देखा जहाँ विजय सर शोभित और भरत की तलाशी लेने के बाद बाकियों की तलाशी ले रहे थे।
"अब का होगा बे!"
आकर्षित ने सिर पर हाथ रखते हुए गहरा अफसोस प्रकट किया और फौरन ध्रुव का ध्यान उसकी ओर चला गया।
"का हुआ मेरे छोटे नवाब नकल लाये हो का?"
मोहन ने अपनी सदाबहार टोन में कहा।
"अबे भक!"
आकर्षित ने उसे झिड़क दिया और ध्रुव और जय की ओर देखकर अजीब अंदाज में पलकें झपकाने लगा।
"अबे पैंट का जेब फटा है!"
उसने दांत दिखाते हुए कहा।
"तो क्या हुआ भाई?"
जय ने उससे सवाल किया।
"अरे भाई!आज मेरे दोनों अंडरवियर गीले थे इसीलिए ऐसे ही चला आया!"
उसका जवाब सुनकर ध्रुव की हँसी छूटने लगी लेकिन उसने हँसी रोक ली और मन ही मन कल्पना करने लगा कि ये बात समझने के बाद विजय सर के चेहरे पर रिएक्शन क्या होगा।सोंचते हुए उसने हँसी मुँह में ही दबा ली जबकि प्रद्युम्न, विराट और देवांश खिलखिलाकर हँस पड़े।
खैर तब तक विजय सर आकर्षित के बगल में आ चुके थे।
"क्या हुआ छोटे प्रिंसिपल कुछ पुर्ची तो नहीं छुपाये हो!"
कहने के साथ उन्होंने जैसे ही उसके शर्ट की पाकेट चेक करने के बाद उसके पैंट की ओर हाथ बढ़ाया वैसे ही फौरन आकर्षित ने अपना हाथ अड़ाकर उन्हें रोक दिया।
"अर.. रहे दो गुरूजी वरना पछताबो!"
उसने कहा जिससे विजय सर खासे नाराज हो गये और जबर्दस्ती करने पर आमादा हो गए लेकिन मोहन ने उनके कान में कुछ कहा जिसके बाद वे खिसायाना चेहरा लेकर उसे नालयक गधा बोलते हुए आगे बढ़ गये।
और बाकी सब हँसने लगे खैर अच्छी तरह से चेकिंग हो जाने के बाद प्रमोद सर की बनाई हुई लिस्ट के अनुसार ध्रुव रूम नम्बर दो की तरफ बढ़ गया जो उसकी वास्तविक क्लास से बस एक कमरे बाद में पड़ता था।
खैर क्लास में घसते ही वो सबसे पहले दौड़ कर दूसरी लाइन पीछे से दूसरी नम्बर के बेंच पर बैठ गया।
"भाई तुम्हारे पीछे ही हूँ!"
विराट ने उसके ठीक पीछे आखिरी बेंच पर बैठते हुए कह।
जबकि आराम से बैठने के बाद उसने चारों ओर देखा और पाया कि उसके काफी दोस्त वहीं मौजूद थे जैसे वीर की गर्लफ्रेंड रश्मि उसके आगे बैठी थी जिसे वो ज्यादा पसंद नहीं करता था और उसके आगे की बेंचों पर गौतम और गौरव भी बैठे थे।
इसके बाद उसने तीसरी लाइन पर नजर डाली जहां क्रमानुसार बीच की पंक्ति में सबसे आगे मोहन फिर विनीत, विराट, प्रद्युम्न, जय और अक्षय बैठे हुए थे।
अभी लोगों का आना-जाना लगा ही था कि तभी उसकी नजर गेट पर पड़ी और उसके होश उड़ गए क्योंकि बाहर इति और उसके क्लास की और भी कुछ लड़कियाँ थीं जो उसी कमरे में आ रही थीं।
ध्रुव का दिल जोरों से धड़कने लगा।
"तुम मेरे पास बैठ जाओ!"
ध्रुव के ठीक बगल पहली लाइन के बीच में बैठी ध्रुव की क्लासमेट प्रगति और शिवन्या ने उसे बुलाते हुए कहा और फिर कनखियों से दोनों ध्रुव की ओर देखकर मुस्कुरा दीं जबकि दीप्ति जो उनसे थोड़ा आगे बैठी थी वो भी मुस्कुरा रही थी।
"थैंक्स दीदी!"
कहने के साथ इति दोनों के बीच में बैठ गई।
और चूंकि टेस्ट अभी शुरू नहीं हुआ था इसलिए वो उन दोनों से बातें करने लगी।
इधर ध्रुव के सारे दोस्त उसे चिढा़ रहे थे और वो मुस्कुराते हुए बार-बार अपनी पेन चेक कर रहा था और हालांकि कभी-कभार चुपके से इति की ओर भी देख लेता है।
"बस ध्रुव शेर इतना न लिखो!"
टेस्ट के बीच भी प्रद्युम्न मौका देखकर उसे चिढा़ रहा था जबकि वोख खुशी से चुईंगम चबाते हुए लिख रहा था।
"भाई दूसरा वाला आंसर दिखा दो!"
प्रगति बार-बार उससे जवाब पूछ रही थी पर वो चाहते हुए भी अपना आंसर ज्यादा नहीं दिखा पा रहा था क्योंकि सामने खड़े टीचर मदन सर लगातार उसे ही देख रहे थे।
"अबे रुक सरजी देख रहे हैं!"
ध्रुव ने झल्लाकर विराट को डपटते हुए कहा जो बार-बार उसे पेन कोंचकर उसकी आंसर सीट दिखाने को कह रहा था।
"भाई तुम्हारे भरोसे हूँ और इसीलिए सिर्फ पहला क्वेश्चन लिख कर बैठा हूँ अब मन हो दिखाओ या न दिखाओ!"
कहने के साथ विराट हाथ बांध कर बैठ गया।
अपनी कापी पूरी लिख लेने के बाद वो विराट को अपनी आंसर सीट कापी कराने लगा जबकि बीच-बीच में प्रगति, शिवन्या और दीप्ति को भी आंसर बता रहा था।वहीं इस बीच ध्रुव ने कई बार इति को उसकी ओर देखते पाया पर जैसे ही वो उसकी ओर देखता इति फौरन अपने कापी में जवाब लिखने लगती जबकि इस पूरे दौरान वो भी लगातार चुईंगम चबा रही थी।
"जो दोनों पाण्डे लोग पगुरा रहे हो मैं सब देख रहा हूँ!"
इतना कहने के साथ ही मदन सर ने ध्रुव को कापी अंदर रखने को बोला और चुईंगम बाहर थूक कर आने को कहा।
खैर जब चुईंगम थूक कर और पानी पीने के बाद ध्रुव लौटा तब तक पहले पेपर का समय समाप्त हो गया था और उन्होंने सबकी कापियां ले लीं जबकि विराट नू पहले प्रश्न का जवाब भी ठीक से नहीं लिखा था और ध्रुव से गुस्सा हो गया हालांकि ध्रुव ने अगले पेपर में पूरा काॅपी कराने का आश्वासन देकर उसे शांत कर दिया।जबकि इस पूरे समय के दौरान जय और प्रद्युम्न मजे लेते हुए पेपर दे रहे थे।
खैर अगले पेपर में तो विराट की किस्मत और भी ज्यादा खराब निकली क्योंकि शुरू के पंद्रह मिनट तक तो ध्रुव लिखने के बजाए इति को निहरता रहा और फिर जैसे ही इति कापी सबमिट करके निकली ध्रुव भी अपनी कापी देकर उसके पीछे-पीछे निकल गया और बाद में विराट ने उस पर बहुत गुस्सा किया जो बुरी तरह से रुआंसा लग रहा था।
"बहुत जबर्दस्त गद्दारी कर गये ध्रुव भाई, कम से कम तुमसे तो ऐसी उम्मीद नहीं थी!"
बाहर निकलने के बाद विराट ने रोनी सी सूरत बनाकर कहा।
खैर इस तरह उनके टेस्ट का पहला दिन निकल गया जो कम से कम उसके हिसाब से बेहद मजेदार और खुशनुमा रहा।
"अच्छा वो मेरे बारे में कुछ बोल रही थी क्या?"
ध्रुव ने बाहर निकलते ही प्रगति, शिवन्या और दीप्ति को घेर लिया।
"अर... नहीं बस वो इतना पूछ रही थी कि तुम पढ़ने में बहुत अच्छे हो क्या?"
प्रगति ने गोलमोल जवाब दिया।
"मेरा मतलब है सब तुमसे आंसर पूछ रहे थे न!"
ध्रुव का चेहरा देखकर उसने आगे जोड़ दिया।
"और तुमने क्या कहा?"
उसने आगे पूछा।
"जाहिर है हमने वही कहा जो सच था कि तुम अच्छे हो।"
तीनों एक साथ कोरस में बोलीं और ध्रुव इसके लिए उनका बहुत कृतज्ञ था।
"लेकिन हमने जब उससे कहा कि उसे तुम्हें मार नहीं खिलवाना चाहिए था तो महारानी मुँह फुलाकर बैठ गईं!"
शिवन्या ने अफसोस जताते हुए कहा।
"ऐसे ही पीछे पड़े रहो एक न एक दिन वो पट जायेगी!"
कहने के दीप्ति मुड़कर दूसरी औओर चली गई और बाकी दोनों के जाने के बाद वो भी अपने दोस्तों के पास लौट आया और हँसते-मुस्कुराते हुए उन्हें पूरी बात बताने लगा।
और आखिरकार अपने घर की ओर कदम बढ़ाते हुए वह खुश लग रहा था।और उस दिन पूरी रात इति के बारे में सोंचने के अलावा उसने अगले दिन के पेपर के लिए अच्छे से पढाई़ की।
अगले दिन भी सबकुछ उसी तरह हुआ जिस तरह पहले दिन हुआ बस फर्क इतना था कि अगले दिन ध्रुव को रूम नम्बर तीन में बैठना पड़ा जो उसके वास्तविक क्लास के ठीक पीछे वाला कमरा था।
ध्रुव आखिरी लाइन में आकर्षित और भरत के पीछे बैठा एक बार फिर दरवाजे की ओर देखकर इति का इंतज़ार कर रहा था लेकिन दुर्भाग्यवश आज उस क्लास में ऐसा सीटिंग प्लान बनाया गया था कि हर इंटरमीडिएट के स्टूडेंट्स के बीच में एक हाईस्कूल का स्टूडेंट या दो हाईस्कूल स्टूडेंट्स के बीच एक इंटरमीडिएट का स्टूडेंट बैठ सकता था।
खैर इति तो नहीं आई जिससे उसका मूड एक बार फिर खराब हो गया लेकिन हाईस्कूल कि लड़कियां जरूर आईं जिनमें से कुछ तो एक से बढ़कर एक थीं।
ध्रुव बैठा हुआ चारों ओर ध्यान से देख रहा था कि तभी सपाट चेहरे वाली एक बेहद खूबसूरत लड़की उसके बगल बैठने लगी लेकिन इससे पहले वो वहां बैठती एक दूसरी लड़की उसकी जगह आकर बैठ गई और वह खूबसूरत लड़की अगली सीट पर आकर्षित और भरत के बीच में बैठना पड़ा जिसके बाद उन दोनों के चेहरे खिल गये थे।उस लड़की को अक्षय और प्रद्युम्न तथा ध्रुव के बाकी फ्रैंड्स सोनाक्षी सिन्हा कहते थे हालांकि उसका नाम सुभी था।
वहीं ध्रुव के पीछे आखिरी बेंच पर प्रद्युम्न और गौतम के बीच में एक लड़की बैठी थी जिसे प्रद्युम्न और अक्षय अनुष्का शर्मा बोलते थे हालांकि उसका नाम गुंजन था जबकि उसी के क्लास में एक और गुंजन नाम की लड़की पढ़ती थी जिसके बारे में ध्रुव को पता था कि वो प्रतीक की गर्लफ्रेंड थी।
वहीं ध्रुव के पास जो लड़की बैठी थी वह ध्रुव की एक क्लासमेट रजनी नाम की लड़की की बहन थी जिसके दूसरी तरफ मोहन बैठा था।
"अबे आज सबकुछ पढ़ के आया हूँ और आज तो मजा आ जायेगा!"
प्रद्युम्न ने अपने दोनों हाथों को रगड़ते हुए कहा जबकि ध्रुव हँस दिया क्योंकि उसे मालूम था कि वो सिर्फ अपने बगल बैठी लड़की को इम्प्रेस करने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बोल रहा था।
और ऐसा ही हुआ क्योंकि पेपर शुरू होने के बाद वो सारे आंसर ध्रुव के काॅपी कर के लिखने लगा।
"भैया कोई नकल न करे कैमरा लगा है!"
मोहन ने लिखना बंद करके अपने सदाबहार अंदाज में कहा।
"कहाँ है कैमरा?"
उसके बगल बैठी लड़की ने पूछा।
"वो देखो!"
उसने खराब होल्डर की ओर इशारा करते हुए कहा और फौरन सब हँसने लगे।
"हाँ!उधर न देखो और कोई नकल नहीं करेगा क्योंकि जो नकल करेगा कैमरा उसे अंदर खींच लेगा!"
प्रद्युम्न की बात सुनकर बाकियों के साथ ध्रुव भी खिलखिलाकर हँस पड़ा और उस दिन पेपर खत्म होने तक उसका मूड काफी हद तक सुधर चुका था।
उसे पूरा यकीन था कि उसका फिजिक्स का दूसरा पेपर छोड़ के बाकी सारा पेपर बहुत अच्छा हुआ था हालांकि उसे यह भी मालूम था कि उसने इंग्लिश के पेपर में कुछ शब्दों का गलत अनुवाद कर दिया था लेकिन फिर भी वह संतुष्ट था क्योंकि उसके हिसाब से यह अबतक का सबसे अच्छा टेस्ट हुआ था।बहरहाल चूंकि मौसम धीरे-धीरे ठंडा हो रहा था इसलिए पेपर देने के बाद ध्रुव जय और देवांश के साथ मैदान में बैठकर खिली हुई धूप का मजा ले रहा था।वहीं कुछ दूर बैठे शोभित, अरविंद और आदित्य अपने-अपने जवाब मिला रहे थे जबकि उसके बाकी सारे दोस्त गेंद धडा़क खेल रहे थे।
"देव!"
ध्रुव को अचानक जैसे कुछ याद आया।
"हाँ!"
उसने चौंकते हुए सवाल किया जबकि वो अपनी गर्लफ्रेंड निशि को देख रहा था।
"तू मुझे अपनी लव स्टोरी बताने वाला था न?"
ध्रुव ने उसे याद दिलाया और जय ने भी दूर खड़ी नाईन्थ क्लास की लड़कियों के एक ग्रुप से नजरें हटाकर ध्रुव की ओर देखा।
"ओह हाँ!अर... उस दिन मैं बता रहा था... "
देवांश ने बोलना शुरू किया जबकि जय और ध्रुव ध्यान से उसे सुनने लगे।
"अर... मेरी वाली उस समय नाईन्थ क्लास में पढ़ती थी और मैं इलेव्नथ में था और हमारा क्लास वहीं चलता था जहाँ आज इति का क्लास चलता है।खैर ये सब तो मैं बता चुका हूँ तो आगे बताता हूँ!वो और उसके क्लास की बाकी लड़कियाँ हमारे बगल वाले क्लास में होमसाइंस की क्लास करने आती थीं और एक दिन जय ने उनमें से एक लड़की को देखा जो खिड़की के किनारे बैठी थी।"
कहने के साथ ही दोनों ने पलट कर जय को देखा जो मुस्कुराने लगा फिर उसने आगे बोलना जारी रखा।
"और जय भाई को वो लड़की पसंद आ गई खैर इसके बाद उस दिन से जय भाई हर रोज उसी बेंच पर बैठते और उसे लाइन मारते रहते थे।इन्हीं के साथ विराट और प्रशांत भी बैठते थे... "
और इसी तरह ध्रुव को सुनाते हुए वो भी पुरानी यादों में खो गया,
"भाई यार वो लड़की मुझे पूरा लाइन दे रही है बे!"
जय ने विराट को कोहनी मारते हुए बताया और विराट बगल की क्लास में खिड़की के किनारे बैठी लड़की को देखने लगा।
"मस्त है भाई!"
प्रशांत और विराट दोनों ने एक साथ कहा।
"तुम्हें लगता है वो मुझसे पटेगी?"
जय ने नर्वस होकर प्रशांत से पूछा।
"पक्का भाई तू हीरो है।"
विराट ने उसे चने की झाड़ पर चढ़ाते हुए कहा।
"भाई वो लाइन दे रही है?"
अबकी बार प्रशांत ने पूछा।
"हाँ!"
जय ने थोड़ा झिझक के साथ जवाब दिया।
"बस भाई तू डबल लाइन मारो वो गारंटीड पटेगी।"
प्रशांत ने उसका हौसला बढ़ाने के लिए कहा।
अगले दिन किसी काम से देवांश कुछ देर के लिए जय के पास आकर बैठ गया और बातो ही बातों में जय ने उसे भी निशी को दिखा दिया जिसे देवांश एकटक देखता रह गया और वो भी देवांश को देख रही थी लेकिन जय का ध्यान इस ओर नहीं गया।
"भाई एक काम कर आई लव यू बोल दे उसे इससे पहले कि कोई और पटा ले उसे!"
विराट ने उसे राय दिया।
"यार उससे बात नहीं कर सकता!"
जय ने दुविधा मे जवाब दिया।
"तू एक काम कर भाई लव लेटर दे दे!"
प्रशांत ने उसे सलाह दी।
"हाँ और अगर उसे अगर मैं न पसंद हुआ तो लेटर ले जाकर सीधे हेडमास्टर को दिखा देखी।"
"इसका भी एक तरीका है!"
विराट ने रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराते हुए कहा।
"क्या?"
जय और प्रशांत ने एकसाथ पूछा।
"भाई तू एक काम कर एक कोरा कागज ले और मोड़ के रख ले और जैसे ही वो क्लास से निकलने लगे उसके पैरों के पास फेंक देना।"
"और इससे क्या होगा?"
प्रशांत ने सवाल किया।
"इससे होगा ये कि अगर वो भी इसे पसंद करती होगी तो फौरन खुशी से कागज उठा लेगी और ये बात क्लियर हो जायेगी लेकिन अगर वो गुस्से से उठाती है तो क्या बिगड़ेगा कागज में कुछ लिखा तो है नहीं।"
खैर तीनों को ये आइडिया जम गया और जैसे ही निशी क्लास खत्म करके वापस जाने लगी जय ने फौरन वही किया जो विराट ने कहा था लेकिन वो इस ओर जरा सा भी ध्यान दिए बिना सीधी निकल गई।
"चलो कम से कम इतना तो पता चला कि भाभी अच्छे घर की है वरना कौन सी अच्छी लड़की ऐसे भीड़भाड़ में लव लेटर उठाती।अगली बार थोड़ा अकेले में ट्राई मारना दोस्त!"
प्रशांत ने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा और बाकी दोनों का भी यही सोंचना था।
इतना बोलने के बाद देवांश रुक गया और जय का गुलाबी हो चुका चेहरा देखने लगा।और फिर थोड़ा सांस लेने के बाद उसने दोबारा बोलना शुरू किया।
"अगली जय भाई उसे लेटर तो नहीं दे पाए लेकिन उस दिन के बाद से निशी हमेशा आगे वाली बेंच पर बैठने जहाँ से उसे मैं दिखता था और वो मुझे।इसी बीच में मुझे कुछ दिनों के लिए इलाहाबाद जाना पड़ा और जब मैं वापस लौटा तो मेरे हाथों में उसका दिया हुआ लव लैटर था और बस उसी दिन से हम दोनों रिलेशनशिप में हैं।"
इतना कहकर देवांश चुप हो गया और मुस्कुराते हुए जय की ओर देखने लगा।देवांश की लव स्टोरी सुनर ध्रुव के मन में जय के लिए असीम सहानुभूति का भाव उमड़ पड़ा।लेकिन इसके बाद उसने बातचीत का विषय बदल दिया और तीनों प्रतीक के बारे में बात करने लगे जिसका घर देवांश की वजह से बस गया था।
खैर एक सप्ताह बाद टेस्ट का रिजल्ट आया और जैसा कि उसे पता था वो फिजिक्स के सेकेंड पेपर में फेल हो गया था जो इति के चक्कर में उसने कोरा ही सबमिट कर दिया था।हालांकि उसे इस बात की भी हैरानी थी कि उसे उस सब्जेक्ट मे एक नम्बर कैसे मिल गया था जबकि उसने सिर्फ एक आंसर लिखा था वो भी आधा-अधूरा।बहरहाल जैसे की उसे अंदाजा था क्लास में शोभित फर्स्ट आया था और अरविंद और जय दोनों सेकंड पोजीशन पर थे जबकि आदित्य तीसरे पोजीशन का इकलौता दावेदार था।
अगले दिन से उनके स्कूल का टाईम-टेबल चेंज हो गया था जैसा कि हेडमास्टर उपाध्याय सर ने उन्हें बताया था... To Be Continued In Next Chapter
                                    Written By
                         Manish Pandey’Rudra’

©manish/pandey/07-02-2018

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