Thursday, February 15, 2018

Adhoore Panne@Zindgi

                 अधूरे पन्ने@जिंदगी
           (अधूरे इश्क़ की पूरी कहानी)

                     अध्याय-पाँच
                   प्यार का इज़हार

जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ था जब ध्रुव को किसी स्कूल में टेस्ट देने में इतना ज्यादा मजा आया था।हालांकि उसके डैड उसके टेस्ट के रिजल्ट से खुश नहीं थे पर ध्रुव को इसकी ज्यादा परवाह नहीं थी। क्योंकि उसे मालूम था कि अगर उसने फिजिक्स के दूसरे पेपर में कोरी काॅपी सबमिट करने के बजाय कुछ लिख दिया होता तो वह क्लास में कम से कम तीसरे पोजीशन पर जरूर आ जाता।
खैर अगले कुछ दिनों के तक उनमें से हर कोई टेस्ट के बारे में ही बात करता रहा जबकि देवांश और प्रतीक के पास बात करने के कुछ और भी विषय थे।
"कल हमने जिंदगी में पहली बार किस किया!"
प्रतीक ने अपने और देवांश के बारे में बताया जबकि दूसरी तरफ विजय सर अपना कुछ जरूरी काम कर रहे थे।
"छिः!तुम दोनों को हो क्या गया है!"
ध्रुव ने नाक सिकोड़ते हुए कहा जैसे उसे उबकाई आ रही हो और जब उसने देवांश और प्रतीक को एक दूसरे को किस करते हुए देखने की कल्पना की तो उसे मितली आने लगी।
"साले तुम दोनों का टेस्ट खराब हो गया है!"
उत्कर्ष ने दोनों के बीच जबर्दस्ती घुसते हुए कहा।
"अबे हट!वो अपने-अपने गर्लफ्रेंड को किस करने की बात कर रहा है।"
देवांश ने झल्ला कर जवाब दिया और उसने प्रतीक की गुद्दी पर हल्की सी चपत लगा दी।
"साले बतानी हो तो पूरी बात बताया कर।"
उसने प्रतीक को डांट लगाई जबकि ध्रुव और वहाँ बैठे बाकी लोग हँसने लगे।
"हाँ वही मेरा मतलब कल हमने पहली बार अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड को किस किया।"
"कब बे और कहाँ?"
उत्कर्ष ने ज्यादा उत्साहित होते हुए पूछा।
"यहीं स्कूल में सुबह!"
अबकी बार देवांश ने मुस्कराते हुए जवाब दिया।
"और किसी ने नही देखा?"
मोहन ने नजदीक खिसकते हुए सवाल किया और हैरानी में प्रतीक और देवांश का मुंह ताकने लगा।
"अबे सुबह छः बजे इतना कोहरा रहता है कि दायें हाथ को बायां हाथ नहीं दिखाई देता ऐसे में हमें कौन देखता।"
देवांश ने उत्साह के साथ जवाब दिया और उसके गालों पर गुलाबी सी छा गई।
"जियो मेरे शेर!"
मोहन ने उसकी पीठ ठोंकी जबकि ध्रुव का ध्यान कहीं और था।वो किसी और दुनिया में ही पहुंच गया था और अब कल्पना कर रहा था कि एक सुबह एसे ही कोहरे में वो और इति बस अकेले खड़े थे और धीरे-धीरे करीब आ रहे थे।
इतने करीब कि उसे इति के सांसों की गर्माहट अपने भीतर महसूस हो रही थी।तभी अचानक उत्कर्ष ने उसे स्वर्ग से वापस धरातल पर खींच लिया और उसे अपने सांसों में अब भी तेज गर्माहट महसूस हो रही थी।
"माफ करना दोस्तों मुझे केमिस्ट्री का होमवर्क करना था।"
कहने के साथ ही ध्रुव तेजी से उन सबसे दूर निकल गया और उसके कानों के पीछे उभरी गुलाबी रंगत को उनमें से किसी ने नहीं देखा।
"अब इसे क्या हो गया?"
मोहन खड़े-खड़े उसे ही घूर रहा था जबकि उत्कर्ष तृप्ति से बातें करने लगा।
अगली सुबह सात बजे कोचिंग जाते वक्त ध्रुव को नहीं मालूम था कि आगे क्या होगा।
खैर कोचिंग पढ़ने के बाद सारे दोस्त एक साथ निकले और थोड़ा आगे एक चौराहे पर पहुंचने के बाद ध्रुव के बाकी सारे दोस्त बायें ओर मुड़ गए जबकि ध्रुव गौरव और प्रशांत के साथ दांये ओर मुड़ गया क्योंकि तीनों का घर एक ही दिशा में पड़ता था।
"ध्रुव भाई मुझे अपनी फिजिक्स की कापी दे देना।"
प्रशांत ने कहा था और ध्रुव ने हाँ कर दिया।
"ठीक है अभी स्कूल में ले लेना।"
"और बताओ भाई कुछ बातचीत हुई भाभी से कि नहीं?"
प्रशांत ने ध्रुव से सवाल किया जबकि गौरव बस उन्हें ध्यान से सुनता रहा।
"कहाँ भाई!अगर एक उस दिन को न जोड़ा जाए जब उसने मुझे डांटा था तो आजतक हम दोनों ने बात नहीं किया।"
ध्रुव ने अफसोस करते हुए जवाब दिया।
और जैसे ही उसकी नजर सामने पड़ी उसका दिल बल्लियों उछलने लगा, उसकी धड़कनें दोगुनी तेज हो गईं।
सामने थोड़ी दूर पर इति उनकी ही ओर आ रही थी पर विपरीत दिशा में और हालांकि उसके कंधे पर उसका स्कूल बैग झूल रहा था लेकिन चूंकि उसने स्कूल की ड्रेस के बजाय सामान्य सा सलवार सूट पहना हुआ था इसलिए ध्रुव ने सीधे अंदाजा लगाया कि वो कोचिंग जा रही होगी।
उसने पहली बार इति को स्कूल ड्रेस के अलावा किसी और कपडे़ में देखा था और उसे देखते हुए यूं मदहोश हो गया कि बस वहीं खड़ा रह गया जबकि बाकी दोनों उससे तीन-चार कदम आगे बढ़ गये लेकिन उसे साथ न चलता देख वो भी रुक गये और मामला समझने की कोशिश करने लगे।
इधर ध्रुव होश खोकर इति को देख रहा था लेकिन इति ने उसपर नजर पड़ते ही सिर झुका लिया और सीधी चलती रही।
भूरी डिजाइनर सलवार और उस पर भूरा ही जरीदार सूट और दुपट्टा पहने वो इतनी खूबसूरत लग रही थी जैसे ध्रुव ने उतनी खूबसूरत किसी को देखा ही नहीं था।बहरहाल बाकी दोनों भी वहीं खड़े-खड़े मुस्कुराते हुए सिचुएशन के मजे ले रहे थे और ध्रुव इति को तब तक देखता रहा जब तक कि इति उसके केमिस्ट्री टीचर के घर की विपरीत दिशा में चलते हुए ओझल नहीं हो गयी।जबकि एक पल के लिए उसे लगा था कि वो विनय सर के यहां केमिस्ट्री पढ़ने जा रही थी पर उसका यह अनुमान गलत निकला।
खैर उस दिन के बाद से हर रोज वो उसे देखने के लिए वहीं खड़ा रहता था और जबतक कि इति के आने की एक प्रतिशत सम्भावना भी रहती तबतक वह वहीं खड़ा रहकर उसका इंतजार करता रहता था।अब तो जिस दिन इति उसे नहीं दिखाई देती थी उस दिन उसका मूड बहुत खराब हो जाता था।
इसी बीच एक दिन जब ध्रुव और उसके बाकी क्लासमेट केमिस्ट्री की प्रैक्टिकल क्लास के लिए गैलरी से होते हुए लैब की ओर बढ़ रहे थे तभी ध्रुव ने देखा कि विजय सर इति की कापी चेक कर रहे थे और उसे जमकर फटकार लगा रहे थे और शायद उन्होंने भी ध्रुव को  देख लिया इसीलिए उनके चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई और उन्होंने जानबूझकर ध्रुव को दिखाते हुए इति के हाथों पर छडी़ से मार दिया।जिसके बाद पूरे दिन ध्रुव उन्हें मन ही मन कोसता रहा यहां तक कि केमिस्ट्री की लैब में भी उसने काफी गड़बड़ कर दी और किसी अजीब से मिश्रण में उसने दो बूंद डायल्यूट हाइड्रो क्लोरिक एसिड की जगह दो बूंद कंसंट्रेटेड हाइड्रो क्लोरिक एसिड की मिला दी और जिसका नतीजा यह हुआ की पूरे लैब में गहरी भूरी जहरीली गैस भर गई और उन सबको लैब छोड़कर वापस क्लासरूम में जाना पड़ा जिसके बाद उसे विनय सर की डांट सुननी पड़ी वो अलग और उस दिन पुरे दो पीरियड थ्योरी लिखनी पड़ी जो किसी सजा से कम नहीं थी।
अगले दिन कोचिंग के बाद दुबला-पतला और सांवले रंगत वाला मगर हँसमुख प्रशांत और ध्रुव एक साथ घर की ओर लौट रहे थे तभी एक बार फिर उसे सामने से आती हुई इति दिख गई।
"अबे देख भाभी आ रही है!"
प्रशांत ने उसे कोहनी मारकर चुपके से इशारा किया।
"आऊच...उसी को तो देख रहा हूँ।"
उसने अपनी बाँह मलते हुए गुस्से में जवाब दिया। आज इति स्कूल ड्रेस में थी जिसका मतलब वो स्कूल आने वाली थी और अचानक ही उसे कुछ सूझा।
"एक काम करेगा?"
ध्रुव ने रहस्यमय ढंग से प्रशांत से सवाल किया।
"क्या?"
बुरी तरह हैरान प्रशांत उसे ऐसे घूरने लगा जैसे उसके पंख निकल आये हों।
"फोटो खींच मेरी तेरे फोन से"
"अपने फोन से क्यों?"प्रशांत ने पूछा- "तुम्हारे फोन से क्यों नहीं"
"साले तेरे फोन का कैमरा मस्त है और मेरे फोन का झंडू कैमरा है"
उसने अपना नोकिया हैंडसेट हवा में लहराते हुए कहा।
"करना क्या है?"
एक बार फिर हैरान लग रहे प्रशांत ने सवाल किया।
"देख जैसे ही वो मेरे पीछे आये तो तू फोटो कैप्चर कर लेना पर मेरा नहीं उसका लेकिन ऐसा लगना चाहिए जैसे तू मेरी पिक्चर ले रहा है!"
ध्रुव ने उसे जल्दी से समझाने की कोशिश की क्योंकि इति तेजी से उनके करीब आ रही थी।
"अबे पागल है क्या वो देख लेगी तो बवाल मच जायेगा मैं नहीं करूँगा।"
प्रशांत ने सिर हिलाते हुए जवाब दिया।
"तू वही कर जो मैं बोल रहा हूँ बाकी अगर कुछ हुआ तो मैं देख लूंगा।"
ध्रुव जैसे यह अजीब दुस्साहसीपूर्ण कदम उठाने का फैसला कर चुका था।
"ओके"
कहने के बाद प्रशांत ध्रुव के ठीक सामने से उसकी पिक्चर्स लेने लगा और ठीक उसके कुछ पल बाद इति ध्रुव के पीछे से गुजर गई।प्रशांत ने यह खूबसूरत मौका नहीं गवांया और फौरन उसने फोटो कैप्चर कर लिया।लेकिन शायद इति ने अंदाजा लगा लिया था कि वे क्या कर रहे थे और इसीलिए उसने सिर झुका लिया था।
खैर इसके बाद ध्रुव इति को मोड़ पर मुड़ जाने तक देखता रहा और इस वक्त वो काफी अच्छा महसूस कर रहा था।
"ला फोटो देखने दे!"
ध्रुव ने प्रशांत से फोन छीनते हुए कहा और फोटोज ढूंढने लगा।
"फोटो कहाँ है?"
कुछ देर बाद ध्रुव ने फोन नजरें हटाकर प्रशांत की ओर देखते हुए पूछा।
"क्या...?"
जबकि प्रशांत बुरी तरह चौंक गया और उसने ध्रुव से फोन छीन लिया।और कुछ देर बाद आखिरकार जब प्रशांत ने फोन से नजरें हटाईं तो उसके चेहरे का रंग पूरा सफेद हो चुका था।
"क्या हुआ?"
ध्रुव ने उसका सफेद पड़ चुका चेहरा देखकर पूछा।
"अर... इसमें मेमोरी कार्ड नहीं लगी थी।"
प्रशांत ने डरते-डरते जवाब दिया।
"और बिना मेमोरी कार्ड के इसमें फोटो कैप्चर नहीं होता।"
आखिरकार जब प्रशांत ने अपनी बात पूरी की तो ध्रुव बस खामोश रहकर उसे घूरता रहा जैसे उसका गला दबाना चाहता हो।
"साॅरी भाई!"
प्रशांत ने माफी मांगते हुए कहा।
"अगर इसके चक्कर में मुझे डांट पड़ा तो तुझे छोडूँगा नहीं मैं।"
कहने के साथ तेज कदमों से ध्रुव घर की ओर चल पड़ा क्योंकि नौ बजे स्कूल भी पहुँचना था।रास्ते में उसने कई बार सोंचा क्या होगा अगर इति ने यह बात आनुराधा मैम को बता दिया तो और यह सोचकर हर बार उसके रोंगटे खड़े हो गए।
खैर स्कूल में पहुंचने के बाद उसने देखा इति पहले से ही वहां मौजूद थी और उसे यकीन था कि एक बार फिर इति उसकी क्लास लेने वाली थी लेकिन जब ऐसा कुछ नहीं हुआ तो उसे काफी आराम मिला।
"और पता है फोटोज खींचने के बाद जब हम देखने लगे तो पता चला कि फोन का स्टोरेज फुल था इसलिए एक भी फोटो कैप्चर ही नहीं हुआ।"
तीसरी पीरियड में प्रशांत हँसते हुए सबको सुबह हुई घटना बता रहा था जबकि ध्रुव के दिल से यह डर निकलने के बाद कि इति उसकी शिकायत करेगी अब उसे भी यह मजेदार लग रहा था।
"तू उसे बोल क्यों नहीं देता?"
रोहित ने उससे सवाल किया।
"क्या?"
"यही कि तू उसे पसंद करता है!"
रोहित ने आराम से जवाब दिया।
"अर.. अभी इसका सही वक्त नहीं आया और जब आयेगा मैं बोल दूँगा।"
"एक बात बोलूं भाई बुरा तो नहीं मानेगा?"
रोहित ने सावधानीपूर्वक सवाल किया।
"क्या?"
ध्रुव ने ठंडे लहजे मे कहा जैसे कि उसे पता था कि वो कोई बुरा लगने वाली बात ही कहेगा।
"अर... मुझे लगता है आकाश ने उसे पटा लिया है।"
रोहित ने सम्हल कर जवाब दिया।
"पागल है क्या?"
ध्रुव बिना सोंचे समझे उस पर चिल्ला पड़ा और फौरन क्लास के बाकी सारे लोग उसे घूरने लगे और वहीं क्लास में मौजूद टीचर वीणा मैम भी उसे घूरने लगी जिससे वो झेंपकर चुपचाप अपनी जगह बैठ गया।इस दौरान उसने तृप्ति और उसकी सहेलियों की खी-खी की आवाज को नजरअंदाज करने की भरसक कोशिश की।
"मेरा मतलब है भाई तुमने भी तो देखा होगा वो हमेशा हँसते हुए आकाश से बातें करती है।"
रोहित ने अपनी बात ठीक ढंग से कहने की कोशिश की और इस बीच ध्रुव खुद को बड़ी मुश्किल से उसकी नाक पर मुक्का मारने से रोक रहा था।एक पल के लिए उसके मन में इति की तस्वीर चलने लगी जिसमें वो एक काले-कलूटे नर-कंकाल जैसे दिखने वाले लड़के की बाहों में बाहें डाले घूमती हुई नजर आ रही थी।और उसे फौरन मितली आने लगी वो सोंच भी नहीं सकता था कि इति उस काले लड़के को पसंद करती होगी जिसे देखकर ऐसा लगता था कि जैसे किसी सूखे हुए कंकाल पर तारकोल से नहलाने के बाद विग लगा कर खड़ा कर दिया हो।
"भाग बे!तेरा दिमाग खराब है क्या?इति उस बेवकूफ़ से कभी प्यार नहीं करेगी।"
ध्रुव ने गुस्से में जवाब दिया और वहाँ से उठकर दूर आखिरी बेंच पर गौतम और जय के बीच में बैठ गया।
इसके बाद पूरे दिन कोई खास घटना नहीं हुई सिवाय फिजिक्स की पीरियड में घटी एक मजेदार घटना के।
फिजिक्स का पीरियड चल रहा था और क्लास में कुछ गिने-चुने लोग ही थे जबकि आधे से ज्यादा लड़के-लड़कियां विजय सर के साथ फिजिक्स की लैब में प्रैक्टिकल कर रहे थे।वहीं चूंकि पीरियड खाली था इसीलिए विनय सर वहां मौजूद बाकी स्टूडेंट्स की कापियां चेक करने लगे।
"भाई अब क्या करें मैंने तो सिर्फ कोचिंग का नोट्स बनाया है और वो भी घर पे है।"
ध्रुव ने परेशान दिखते हुए जय से सवाल किया जबकि उसकी हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं थी।और चूंकि दोनों पहले भी लगातार बहाने बनाकर कापियां चेक करवाने से बचते आये थे इसलिए उन्हें कोई नया बहाना खोजने में और भी परेशानी हो रही थी।
"अबे छोड़ मैंनें भी नहीं बनाया है?"
जय ने जवाब दिया।
अभी दोनों ठीक से कुछ सोंच भी नहीं पाये थे कि तभी विनय सर ने उनकी कापियां मांग लीं।
"चलो दोनों काॅपी लेके आओ!"
विनय सर ने जोरदार आवाज़ में उन्हें बुलाया।
"अर...काॅपी तो नहीं है सर!"
दोनों नें एक साथ जवाब दिया।
"क्यों!कहाँ गई काॅपी?
उन्होंने हड़काकर पूछा।
"अरविंद लेकर गया है!"
दोनों ने बिना सोंचे एकसाथ जवाब दे दिया और एक दूसरे के जवाब सुनकर बुरी तरह हैरान रह गए जबकि केमिस्ट्री टीचर उन्हें गुस्से और हिकारत से घूरने लगे।
"अर... मेरी काॅपी गौरव लेके गया है।"
ध्रुव ने अपना जवाब ठीक करते हुए कहा क्योंकि अरविंद की तरह गौरव भी आज स्कूल नहीं आया था।लेकिन उसके जवाब से विनय सर को ज्यादा संतुष्टी नहीं मिली और फौरन वे उठकर खड़े हो गए और उन दोनों की तरफ आने लगे।
उनके पास पहुंचते ही विनय सर ने दोनों की गर्दन पकड़ ली और उनके सर आपस में लडा़ने लगे।
"तुम दोनों एक नम्बर के फ्राॅड हो रोज फ्राडी करते हो।"
और जब उन्होंने उनके गर्दन छोड़े तो दोनों अपना-अपना सिर मलने लगे।
"अरविंद तो यहीं हास्टल में रहता है न जाओ उससे काॅपी लेकर आओ।"
उन्होंने जय को आदेश दिया और फौरन जय उठकर बाहर निकल गया।
"अरे.... अरे.... तुम कहाँ चल दिए?"
केमिस्ट्री टीचर ने ध्रुव को रोकने की कोशिश की मगर वो भी उठकर तेजी से जय के पीछे निकल गया और फिर छुट्टी होने तक दोनों नहीं लौटे वहीं हाॅस्टल में रुककर अरविंद से बातें करते रहे जिसके लिए अगले दिन विनय सर ने उन्हें जमकर फटकार लगाई।
खैर छुट्टी के बाद ध्रुव इति के पीछे-पीछे चलता रहा और हालांकि वो बस एक बार इति से बातें करना चाहता था लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं बोल पाया।
और इति को देखने के लिए अगले दिन का इंतजार करने लगा।
उस दिन उसने नई खरीदी हुई ब्लैक टीशर्ट और ब्लू कलर की जींस पहनी हुई थी जिसके ऊपर उसने क्रीम कलर की खुली चेन वाली शर्ट भी पहन रखी थी और कानों में इयरफोन लगाये मस्ती में कोचिंग पढ़कर लौट रहा था।उस दिन उसने बालों को भी स्टाइलिश ढंग से बनाने की कोशिश की थी और कुल मिलाकर आज वो हमेशा से कुछ अलग और शायद काफी स्मार्ट लग रहा था।शायद यही वजह थी जो हर रोज़ उसे देखकर उससे आंखें चुराने वाली इति भी आज उसे बार-बार देख रही थी।
इसी बात ने ध्रुव को उद्दंड बना दिया और रोजाना सिर्फ इति को देखते हुए अपने रास्ते चले जाने वाला ध्रुव आज वापस पलट कर इति के पीछे चलने लगा।
लेकिन मोड़ पर पहुंचते ही उसे लगा जैसे इति ने उससे कुछ कहा हालांकि उसने इयरफोन लगा रख था इसलिए इस बात की ज्यादा संभावना थी कि वो गलत हो।मगर उसे पूरा यकीन था कि इति के होंठ हिले थे।
"माफ कीजिए कुछ कहा आपने?"
उसने एक कान से इयरफोन हटाकर पूछा और इति के चेहरे पर उभरी मुस्कुराहट देखकर उसे आश्चर्य हुआ।हालांकि उसका दिल जोरों से धड़क रहा था।
"इधर कहाँ जा रहे हो कोई काम है क्या?"
इति ने उसपर अर्थपूर्ण ढंग से निगाह डालते हुए पूछा।जबकि ध्रुव उसके अचानक सवाल करने से काफी ज्यादा हैरान था।
"अर...हाँ!"
इससे पहले कि कुछ सोंचता उसने जल्दी से सिर हिलाकर जवाब दिया और अपने जवाब पर खुद हैरान था।
"क्या?"
इति ने उससे दोबारा सवाल किया।
"अर...एक फ्रैंड से काम था!"
एक बार फिर ध्रुव ने बिना कुछ सोचे समझे जवाब दे दिया और हालांकि इति उसका जवाब सुनकर खामोश हो गई थी पर उसके चेहरे पर उभरे अविश्वास के भाव को देखकर ध्रुव को नहीं लग रहा था कि उसे उसपर विश्वास हुआ होगा।
खैर उसने दोबारा इयरफोन कान में लगाया और तेजी से आगे बढ़ गया जबकि मन ही मन खुद को कोस रहा था तभी थोड़ी दूर पर उसने वीर, जय और विराट के साथ खड़े प्रद्युम्न को देखा जिसने उसे हाथ हिलाकर अपने पास बुलाया और उन्हें देखकर ध्रुव को जितनी खुशी आज हुई थी उतनी पहले कभी नहीं हुई थी।उसने हल्के से नजरें बचाकर इति की ओर देखा और उसे हैरानी हुई जब उसने इति के चेहरे पर खिली हुई मुस्कान देखी।
खैर इसके बाद इति सीधी चलती हुई उनकी आँखों से ओझल हो गई और ध्रुव बाकियों से बातें करने लगा।
"का भाई लग रहा है भाभी पट गई।"
वीर ने उसे छेड़ते हुए कहा जबकि वो मुस्कुराने लगा।इतनी जबर्दस्त बात वो इतनी आसानी से उन्हें बताना नहीं चाहता था और चूंकि वे सब हमेशा उसका साथ देते थे इसलिए ध्रुव उनसे यह बात ज्यादा देर तक छुपाना भी नहीं चाहता था।उसके मन में इस वक्त दो महत्वपूर्ण इच्छाओं के बीच जबर्दस्त लडा़ई चल रही और आखिरकार उसने चारों को पूरी बात बता दी।
"भाई ये तो पार्टी वाली न्यूज है।"
विराट और वीर के अपनी-अपनी खुशी प्रकट करने के बाद आखिरकार तीनों पास के एक होटल की ओर चल पड़े।
उस दिन स्कूल में भी ध्रुव ने खुद को काफी खुश और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ पाया।हालांकि उसका दिल बार-बार कह रहा था कि हो न हो पर ये शायद उसके प्यार की शुरूआत थी और जब उसने यह घटना शिवन्या और दीप्ति को बताई तो उसे जानकर खुशी हुई कि उनका भी यही मानना था।
"भाई वो तुम्हें सच में पसंद करती है अब बस उसे अपने दिल की बात बोल दो इससे पहले कि देर हो जाये।"
प्रेयर के लिए बड़े हाॅल में जाते वक्त प्रगति ने उसे समझाया।खैर इति का खिला हुआ चेहरा देखकर ध्रुव को भी लगा कि शायद प्रगति सही कह रही थी।
इसके बाद सबने हमेशा की तरह प्रेयर की और फिर हेडमास्टर उपाध्याय जी स्टूडेंट्स को कुछ जरूरी जानकारियां देने के लिए आगे आए।
"मेरे प्रिय विद्यार्थियों जैसा कि आप सब जानते हैं कि कल चौदह नवम्बर यानी बाल दिवस है तो जैसा कि हर साल होता है इस साल भी हमारे विद्यालय में कुछ आयोजन किया जायेगा जैसे लड़कियों के लिए गायन प्रतियोगिता, मेंहदी प्रतियोगिता, स्पीच और लड़कों के लिए थोड़ी अच्छी खेलकूद प्रतियोगिता।और मुझे आपसे पूरी आशा है कि इस पूरे समय के दौरान आप सभ्यता का परिचय देते हुए विभिन्न आयोजनों में भाग लेंगे।"
उनके इतना बोलते ही हाॅल बुदबुदाहटों के शोर से भर गया।बहरहाल उन्होंने अपनी आवाज़ हाॅल के शोर से ऊपर उठाते हुए आगे कहना शुरू किया।
"और इसी के साथ मुझे आपको यह बताते हुए अत्यंत खुशी हो रही है की अगले सप्ताह से आपका वार्षिक निरीक्षण यानी इंस्पेक्शन होगा जिसके लिए हमारे विद्यालय में स्कूल के कुछ गवर्नर मेंबर भी आने वाले हैं और इस दौरान मैं चाहता हूँ आप अच्छे से अच्छा बर्ताव करें और इसके साथ यह भी जरूरी है कि सभी क्लासों में शत-प्रतिशत उपस्थिति हो।"
इस तरह उन्होंने अपनी बात पूरी की और विद्यार्थियों को इस बारे में कानाफूसी और बहस करने का पूरा मौका देते हुए क्लास में जाने की अनुमति दे दी।
खैर इसके बाद जब ध्रुव क्लास में गया तो जहाँ आधे लड़के उसे अगले दिन होने वाले खेल प्रतियोगिता के बारे में गर्मागर्म बहस करते हुए दिखे वहीं बाकी लड़के-लड़कियां उसे अगले सप्ताह शुरू होने वाले इंस्पेक्शन के बारे में बहस करते हुए दिखे और फिर जय के साथ ध्रुव भी इस बहस में शामिल हो गया।
इसी बीच उसे पता चला कि इंटरमीडिएट फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर का क्रिकेट टूर्नामेंट भी होना था और विजय सर ने टीम की लिस्ट में उसका नाम भी दे दिया था।
"पर सर मुझे क्रिकेट खेलना नहीं आता!"
उसने चौथी बार विजय सर से रिक्वेस्ट की ताकि वे उसकी जगह टीम में किसी और को जगह दे दें।
"कोई बात नहीं बैट पकड़ के खड़े रहना अब नाम वापस नहीं लिया जा सकता।"
विजय सर ने आखिरी बार अपनी बात रखी और उस पर हिकारत भरी निगाह डालने के बाद बाहर निकल गये।
"तू टेंशन मत ले हमारे पास एक से एक धाकड़ प्लेयर हैं।"
विराट ने उसके कंधे पर हाथ रखकर समझाया और फिर सब अपनी पढ़ाई करने लगे।
खैर दोपहर को केमिस्ट्री की लैब जाने में ध्रुव को थोड़ी देर हो गई जबकि बाकी सारे लड़के-लड़कियां पहले ही जा चुके थे बहरहाल इस बारे में न सोंचते हुए ध्रुव प्रैक्टिकल बुक और फाइल लेकर अकेला ही अंदर गैलरी की ओर चल पड़ा।जाते हुए उसने इति पर प्यार भरी निगाह डाली जो फिजिक्स के नोट्स लिखने में व्यस्त थी।
खैर ध्रुव इति की क्लास छोड़कर आगे बढ़ गया और सीढ़ियां चढ़ने लगा तभी अचानक उसके सामने दो लड़के कूदकर आ गए जो शायद वहाँ बैठे काफी देर से उसका इंतजार कर रहे थे।
उसने दोंनों को ऊपर से नीचे देखा और पाया कि दोनों इति के क्लासमेट थे।जिनमें से एक तो वही सौरव था जिसे इति ने राखी बाँधी थी और दूसरा आकाश था जिसे वो बिल्कुल भी पसंद नहीं करता था और इसका कारण वो खुद भी नहीं जानता था।
"क्या है?"
उसने दोनों का उसे घूरना नजरंदाज करके सामान्य से ज्यादा बहादुरी दिखाते हुए पूछा जबकि शारीरिक दृष्टि से दोनों उसके दोगुने थे।
"क्या बे तुझे नहीं लगता कि तू कुछ ज्यादा ही हवा में उड़ रहा है।"
सौरव ने उंगलियां चटकाटे हुए कहा।
"क्या मतलब?"
ध्रुव ने सीधे उससे सवाल किया।
"मतलब ये बेटा कि ज्यादा हवा में न उडो़ और अपनी आँखें अपने ही क्लास तक रखो... "
अबकी बार आकाश ने सौरव को अपने रास्ते से हटाकर ध्रुव के सामने आते हुए कहा और उस वक्त ध्रुव ने ध्यान दिया कि आकाश लगभग उससे आधा फुट लंबा था।
"वरना?"
ध्रुव ने उसकी बात सुने बिना ही उसे घूरते हुये व्यंग्य से पूछा।
"वरना तुम्हारा वो हाल करूंगा कि मेरी तो क्या अपनी क्लास में भी नहीं देख पाओगे।"
आकाश ने उसे सीधे-सपाट लहजे में धमकी देकर कहा।
इससे पहले कि ध्रुव कोई तीखा जवाब देता उसे अपने पीछे से एक आवाज सुनाई दी।
"और मैं भी देखना चाहूंगा कि ये तुम कैसे करते हो।"
ध्रुव फौरन अपने दोस्त विनीत की आवाज़ पहचान गया और खुश होकर पीछे मु़डा़।वहां सिर्फ विनीत ही नहीं बल्कि रजत भी खड़ा था और दोनों की मुठ्ठियां भिंची हुई थी।
और अब जब ध्रुव अकेला नहीं था तो सौरव और आकाश से कुछ जवाब देते नहीं बन पड़ा।
"हाँ कल के गेम में जरूर देखना।"
कहने के साथ वे दोनों अंगुलियां चटकाते हूए और ध्रुव पर कहर भरी निगाह डालने के बाद धड़ाधड़ाते हुए सीढ़ियों से नीचे उतर गये।जबकि ध्रुव ने उपर जाते हुए एक बार पलट कर उनकी ओर देखा और यह देखकर उसे हैरानी हुई कि उन दोनों की काली बटन जैसी आँखे दुर्भावना से फैली हुई थीं।
"क्या बोल रहे थे कमीने?"
विनीत और रजत ने एक साथ सवाल किया।
"वो... अर.... कुछ नहीं जाने दो हमें जल्दी से क्लास में पहुंचना चाहिए पहले ही काफी देर हो चुकी है।"
कहने के साथ ध्रुव बाकी दोनों के साथ केमिस्ट्री लैब की तरफ़ तेजी से बढ़ गया।
"अर... वैसे तुम दोनों बाहर क्यों घूम रहे हो और ये तुम्हारे हाथ में क्या लगा है?"
ध्रुव ने भौंहें उठाते हुए उनसे सवाल किया।
"हम दोनों!हम तो बस बाथरूम के लिए गये थे।"
कहने के साथ दोनों ने एक दूसरे की ओर देखकर आँख मारी और अपने हाथों पर लगी लाल मिट्टी जैसी चीज बाफ करते हुए मुस्कुरा कर केमिस्ट्री लैब में घुस गए।
विनय सर से थोड़ी डांट सुनने के बाद जब विनीत ने प्रद्युम्न और बाकियों को सीढ़ी पर हुई घटना के बारे में बताया तो वे भी इस बारे मे गम्भीरता से सोंचने लगे क्योंकि उन्हें ध्रुव से ज्यादा अच्छी तरह पता था कि वे दोनों कितने बुरे और कमीने थे।
"कल के गेम में वो जरूर कुछ न कुछ करेगा हमें सावधान रहना होगा।"
प्रद्युम्न ने चिंतित निगाह उस पर डाली और आने वाले समय के बारे में सोचने लगा।
"तुम लोग भी बेकार में टेंशन ले रहे हो।"
खैर इसी प्रैक्टिकल क्लास खत्म करके अपनी क्लास में लौटते वक्त उसने सुना कि स्कूल के प्योन काली प्रसाद हेडमास्टर उपाध्याय से इस बारे में शिकायत कर रहा था कि किसी शरारती बच्चे ने स्कूल के सारे टायलेट सीटों में ईंटें भर दी थीं।और अचानक ही उसे ध्यान आया कि ऐसा कौन कर सकता था।
छुट्टी के बाद क्लास से निकलते हुए ध्रुव नेजय और प्रद्युम्न से कहा जब उन दोनों ने उसके सामने उसे घर तक छोड़ने की बात की लेकिन उसने इससे साफ़ इंकार कर दिया और वो हर दिन की तरह उस दिन भी इति के पीछे-पीछे चल पड़ा।
अगले दिन कोचिंग से लौटते वक्त ध्रुव स्कूल में होने वाले टूर्नामेंट को लेकर बहुत टेंशन में था क्योंकि जहाँ तक उसे पता था उनका मैच देखने के लिए सारा स्कूल आने वाला था और शायद इति भी और इसीलिए उस दिन पहली बार वह चाह रहा था कि काश इति स्कूल न आये आज लेकिन रास्ते में उसने जब इति को स्कूल ड्रेस में देखा तो उसका दिल और भी जोरों से धड़कने लगा बहरहाल इस वक्त उसे किसी भी मैच की परवाह नहीं थी।इस वक्त बस उसे इति की परवाह थी।
आगे सड़क की मोड़ पर इति के गायब हो जाने के बाद एकबार फिर उसे बुरी-बुरी आशंकाओं ने आ घेरा।
"काश इति मैच देखने न आये।"
यही सोंचते हुए कुछ देर बाद वो स्कूल के लिए निकल पड़ा और आज उसने ठीक से नाश्ता भी नहीं किया था।
"क्यों हीरो डर लग रहा है?"
स्कूल के गेट पर खड़े आकाश और उसके दोस्तों ने उसपर व्यंग्य किया।
"डर और तुझसे.... तुझसे तो मेरे घर का कुत्ता भी न डरे।"
ध्रुव ने लापरवाही से कहा और ठीक उसी वक्त ध्रुव के पीछे उसके बाकी दोस्त पहुंच गए इसलिए आकाश और उसके दोस्त अंगुलियां चटकाने और कहर ढा़ती निगाहों से उसे घूरने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं खर पाये।
खैर ध्रुव अपने दोस्तों के साथ हँसता-मुस्कुराता क्लास की ओर बढ़ गया।इसके बाद उसने सिंगिग कॉम्पिटीशन में इति की क्लासमेट यशी के जीतने पर जोरदार तालियाँ बजाई जबकि मेंहदी प्रतियोगिता में उसकी क्लासमेट प्रगति और रंगोली में शिवन्या ने बाजी मारी और इसके बाद हाईस्कूल के लड़कों ने क्रिकेट में नाइन्थ क्लास के लड़कों को तीस रनों से हराया।
"मैच बस दस मिनट में शुरू होने वाला है।"
विजय सर ने आकर बताया और फिर दोबारा वापस चले गए।जबकि ध्रुव और उसकी टीम जिसमें प्रद्युम्न, जय, अरविंद, अक्षय, विराट, वीर बैट्समैन के तौर पर जबकि भरत, प्रशांत और देवेश बाॅलर के तौर पर उतरने वाले थे।वहीं विनीत और खुद ध्रुव आलराउंडर के तौर पर मैदान में उतरने वाले थे।
"डर लग रहा है?"
जूते की लैस बाँधते हुए प्रद्युम्न ने पूछा।
"अर... नहीं!"
ध्रुव ने लापरवाही से जवाब दिया।
"पर तुम्हे डरना चाहिए क्योंकि जहाँ तक मुझे याद है पिछले साल एक ओवर खेलने के बाद मुझे हास्पीटल जाना पड़ा था!"
कहने के साथ ही प्रद्युम्न ने दरवाज़ा खोला और निकल कर मैदान की ओर बढ़ गया है।
"वो मजाक कर रहा था न!"
ध्रुव ने अनिश्चितता से बाकियों की ओर देखते हुए पूछा।
"मुझे इसका अफसोस है पर नहीं!वो मजाक नहीं कर रहा था।"
अरविंद ने जवाब दिया बहरहाल ध्रुव को इससे ज्यादा राहत नहीं मिली।
"तुम टेंशन मत लो भाई हमारे सारे प्लेयर्स जबर्दस्त हैं हम तुम्हें पिच पर उतरने ही नहीं देंगे बस फील्डिंग के वक्त खुदको बचाना।"
जय ने उसका कंधा थपथपा कर कहा और इसके बाद ध्रुव भी बकियों के पीछे निकल गया।उसने मैदान में पहुंच कर देखा और पाया पिच के चारों तरफ बने दर्शक दीर्घा में स्कूल के हेडमास्टर सहित बाकी स्टूडेंट्स भी मौजूद थे।वहीं दूसरी तरफ जैसा कि उसे लग रहा था इति भी वहां मौजूद थी और अपने क्लास का समर्थन कर रही थी।
थोड़ी देर बाद उनकी प्रतिद्वंद्वी टीम जिसका कैप्टन खुद आकाश था वो भी मैदान में आ गये हालांकि ध्रुव जानता था कि आकाश और उसके दोस्त जिनमें सौरव, दिलीप, मोहित, प्रियंक और भी कई लोग थे जो बहुत अच्छा खेलते थे फिर भी आज वो उन्हें हराना चाहता था।
"तो मेहरबान-कदरदान हो जाईये तैयार क्योंकि आ गई हैं पिच पर सिटी स्टैंडर्ड स्कूल की दोनों टीमें।"
ध्रुव ने कमेंट्री कर रहे मोहन की आवाज झट से पहचान ली।
"मोहन!मैच होने जा रहा है करतब नहीं।"
विजय सर ने उसे फटकारा।
"तो फ्रैंड्स आज का महामुकाबला है फाइनल ईयर और फर्स्ट ईयर के बीच।"
ध्रुव ने दूसरी आवाज को भी पहचान लिया जो उत्कर्ष की थी और उसने मन ही मन सोंचा मैच का तो नहीं पता पर कमेंट्री जरूर मजेदार होने वाली थी।
"और ये हमारे अम्पायर मदन सर जो शायद टाॅस कराने के लिए कमला पसंद का रैपर खोज रहे हैं।"
"मोहन!"
मोहन ने कमेंट्री करते हुए कहा और फौरन ध्रुव को हँसी रोकनी पड़ी जबकि दर्शकदीर्घा में बैठे लोग हँसने लगे।खैर मदन सर ने एक सिक्का निकाला और दोनों टीमों के कप्तान प्रद्युम्न और आकाश टाॅस कराने के लिए आगे आये।
"हेड्स!"
प्रद्युम्न ने बोला और सिक्का जमीन पर पड़ने के बाद हेड्स ही आया और अपनी टीम से बात करने के बाद प्रद्युम्न ने पहले बाॅल डालने का फैसला किया।
"और ये हमारे गैंग.. अर साॅरी टीम के कप्तान प्रद्युम्न ने समझदारी भरा निर्णय लेते हुए पहले बच्चों को खेलने का मौका दिया।"
"मोहन!"
विजय सर ने एक बार फिर मोहन को ठीक से कमेंट्री करने को कहा।
खैर प्रद्युम्न ने पहला ओवर खुद डालने का फैसला किया और फील्डिंग सेट कराने के बाद उसने एक बकरा दाढ़ी वाले लड़के को आॅफ स्पिन बाॅल डाली जिसे वो झेल गया।
"अब भईया तू कमेंट्री करौ तनिक हम कमला फांक लें।"
कहने के बाद मोहन ने माइक उत्कर्ष को पकड़ा दिया जो ठीक-ठाक कमेंट्री कर रहा था।
"और ये पहले ओवर की दूसरी बाॅल जो प्लेयर ने लांग आॅन पर लगे ध्रुव की ओर मार दी है.... और ये ध्रुव ने बाॅल पकडी़ और ये शानदार थ्रो हालांकि खिलाड़ी दो रन पूरे कर चुका था पर ध्रुव हमारा नया और बेहतरीन खिलाड़ी है बेहद जांबाज और दिलेर..... "
"मैच हो रहा है युद्ध नहीं!"
विजय सर ने उत्कर्ष को चेतावनी देकर कहा।
इसके बाद अगली गेंद प्रद्युम्न ने फुलटाॅश डाल दी जिस उस दिलीप ने जबर्दस्त छक्का जड़ दिया।
पर इससे सबक लेते हुए उसने अगली दो बाॅल दिलीप को ही बीट करा दी।
और इस तरह पहले ओवर में आठ रन देने के बाद प्रद्युम्न ने जय को स्लिप पर तैनात कर दिया और बाॅल भरत की ओर उछालने के बाद खुद फील्डिंग करने चला गया।
"तो अब हमारे नये बाॅलर भरत आ रहे हैं जिन्हें पहली ही बाॅल पे विकेट लेना ज्यादा पसंद है ओह यह क्या ये तो बखरे जैसी दाढवाले ने छ्क्का जड़ दिया।अबे भरत तुझे कितनी बार कहा है कि फुलटाॅश मत फेंका कर राईट हैंडेड बैट्समैन है तो... "
"उत्कर्ष!"
विजय सर ने चीख कर कहा।
"कमेंट्री पर ध्यान दो और उन्हें खेलने दो।"
"जी सर!"
कहने के बाद उत्कर्ष दोबारा कमेंट्री करने लगा।
और वहाँ मैदान पर ध्रुव अपना ध्यान इति के बजाए मैच पर लगाने की कोशिश कर रहा था जबकि इसी कोशिश के बीच उससे दो चौके छूट गये और जल्दी ही विरोधी टीम ने पचास रन पूरे कर लिए।
भरत और देवांश ने मिलकर विरोधी टीम को रोकने की काफी कोशिश की लेकिन विकेट निकालना जरा मुश्किल लग रहा था।
"प्रशांत ने चौथे ओवर की तीसरी गेंद डाली और वाकई लाजवाब गुगली थी पर ये के ये सीधा बोल्ड हो गया।क्या बात है प्रशांत और इस तरह प्रशांत ने पहला विकेट ले लिया और अब बकरे जैसी दाढ़ी वाले भाई वापस पवेलियन लौट रहे हैं जबकि दूसरी तरफ खेलने के लिए सौरव आ रहा है।अब आपको बता दूँ कि ये एक नम्बर का चोर है पिछले मैच में हारे हुए दस रुपये इसने अभी तक नहीं दिये है... "
उत्कर्ष अपने ही तरीके से कमेंट्री कर रहा था।
"लाऔ अब हम करब!"
मोहन ने उत्कर्ष से माइक छीनते हुए कहा।
"साले तुझसे कितनी बार कहा है माइक पर मत थूक!"
"तब कहाँ थूकी तोहार जेब में का?"
"भाग बे!"
दोनों कमेंट्री करना छोड़कर आपस में भिड़ गए।
"और हमारे अगले बाॅलर हैं भैया देवांश जी अगर इसने मेरी वाली को न पटाया होता तो मैं इसके बारे में अच्छा जरूर कहता... "
"मोहन गधे कमेंट्री करो तीन विकेट हो गये!"
"ओह अच्छा कब?"
कमेंट्री करने के बजाय मोहन ने उन्हीं से सवाल किया।
"गधे बेवकूफ कमेंट्री पर ध्यान दो!"
विजय सर ने गुस्से में दांत पीसते हुए कहा।
"अच्छा!अच्छा रुको गर्लफ्रेंड कै फोन आवा है बात कर ली।"
कहने के बाद उसने बिना माइक बंद किए काॅल रिसीव कर लिया और फोन पर बात करने लगा।
"अच्छा!अच्छा जान अभी मैच हो  रहा है खत्म हो जायेगा तब मिस्ड काल मारूँगा तब फोन करना बाय!"
कहने के साथ उसने फोन रख दिया लेकिन इससे पहले कि वह कुछ बोलता उत्कर्ष ने माइक छीन लिया और खुद कमेंट्री करने लगा।
"और ये रहा एक और चौका।इसी के साथ बारह ओवर में चार विकेट पर आकाश की टीम ने एक सौ सत्रह रन पूरे कर लिए हैं जहाँ कैप्टन आकाश और उनके सबसे अच्छे प्लेयर दिलीप इस वक्त मैदान में मौजूद हैं।और इसबार हमारी टीम के कप्तान प्रद्युम्न ने गेंदबाजी में तब्दीली की और अक्षय को गेंदबाजी करने के लिए भेंज दिया जिनकी पहली ही गेंद पर दिलीप ने लांग आॅन की दिशा में छ्क्का जड़ दिया।इसका विकेट उखाड़ अक्षय कुमार।"
बहरहाल पंद्रहवा ओवर खुद अरविंद डालने आया जिसने पहली ही बाॅल पर दिलीप का विकेट उखाड़ दिया।
"अरे वाह अरविंद भाई कै तो जलवा है आज शाम को अरविंद के लिए मुर्गा मेरी तरफ से।"
मोहन अपनी ही धुन में कमेन्ट्री करता रहा।
खैर इसके बाद अगले पाँच ओवरों में आकाश ने अकेले ही चालीस रन बना दिए और इस तरह आखिरी बाॅल पर चौका जड़ने के साथ ही आकाश की टीम ने सात रन के नुकसान पर पूरे दो सौ चौबीस रन बना लिए।
"और अब से सिर्फ पाँच मिनट बाद हमारी टीम बैटिंग करने के लिए मैदान में उतरेगी।जिन्हें मैच जीतने के लिए बीस ओवरों में दो सौ पच्चीस रनों की आवश्यकता है।"
उत्कर्ष ने कमेंट्री करते हुए कहा।
"तब तक आप सब भी कुछ खा पी लीजिए और जिसको-जिसको कमला पसंद खानी हो कमेंट्री बाक्स में दो-दो रुपये जमा करा दे।"
एक बार फिर विजय सर के फटकार लगाने के बावजूद मोहन ने अपनी कमेंट्री जारी रखी।
वहीं ध्रुव की टीम भी चेंज करके पिच पर पहुंच चुकी थी।बैटिंग लाइन अप के अनुसार सबसे पहले अक्षय और विराट दोनों पिच पर आ गए।
"और यहाँ दुश्मनों के बीच लोहा लेने के लिए हमारे गैंग के मेरा मतलब है टीम के विराट कोहली और शिखर धवन पिच पर आ चुके हैं।"
उत्कर्ष ने मोहन से माइक छीनकर कमेंट्री करते हुए कहा।
"और ये आई आकाश की पहली ही फास्ट बाॅल जिसे हमारे अक्षय कुमार ने सम्मान के साथ लांग आॅन की बाउंड्री के पार पहुंचा दिया।इसे कहते हैं छोटे पैकेट में बड़ा धमाका।"
इसी के साथ आकश ने अगली बाॅल डाली जो वाइड निकल गई।जबकि ओवर के अगले बाॅल पर अक्षय ने एक सिंगल निकाला और विराट को क्रीज पर आने का मौका दिया।
"और ये आई ओवर की चौथी और विकेट टू विकेट फास्ट बाॅल और हमारे विराट भैया ने शानदार फुर्ती दिखाते हुए बाॅल को लेग बाउंड्री की ओर उठा दिया।बाॅल काफी देर तक हवा में रही पर आखिरकार शानदार छक्का।शायद आज मदन सर को फुल बाॅडी मसाज की जरूरत पडे़गी।"
उत्कर्ष से माईक छीनते हुए मोहन कमेंट्री करने लगा।
"मोहन गधे कहीं के ठीक से कमेंट्री करो।"
पहली ओवर की आखिरी दो गेंदों पर विराट ने बेहतरीन छक्का और चौका जड़ दिया और वहाँ दूर दर्शकदीर्घा में बैठे लोग तालियाँ बजाने लगे।
एक बार फिर विजय सर ने उसे फटकारा।
"और सातवीं ओवर की तीसरी बाॅल और हमारे मानव बम अक्षय का लगातार तीसरा चौका।अरे वाह ये तो हैट्रिक है।"
कमेंट्री उत्कर्ष ने सम्हाल ली जबकि मोहन गुटखा चबाने लगा।
इसी बीच आकाश ने सौरव को इशारा करके कुछ बताया और उसने अगली बाॅल शार्ट पिच रख दी।
"अरे ये क्या ये तो सरासर बेईमानी है।"
उत्कर्ष ने कमेंट्री करते हुए कहा और अचानक उसने कोई भद्दी सी गाली दी जिसे सुनकर विजय सर उसे मारने दौड़ पड़े जबकि दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों की आह निकल गई।दरअसल हुआ यह था कि सौरव ने जानबूझकर बाॅल अक्षय के चेहरे पर मार दिया और अगले ही पल हवा में खून से भरी थूक उड़ाता हुआ अक्षय जमीन पर लेट गया।जबकि उसकी बाकी टीम और ध्रुव खुद भी दौड़ते हुए पिच पर आ पहुंचे।
"ओह इसे तो रिटायर करना पडे़गा।"
प्रद्युम्न ने आह भरते हुए कहा और अंपायर को अपना निर्णय बताने के बाद उसने अक्षय को बाकियों के साथ भेंज दिया।
"सात ओवर में अस्सी रन हो चुके हैं और वो भी बिना किसी नुकसान के पर विरोधियों की इस घटिया और छिछोरी हरकत के बाद... "
"उत्कर्ष ठीक से कमेंट्री करो!"
विजय सर ने उसे चेतावनी दी।
"अच्छा!तो अब पिच पर मौजूद हैं हमारे विराट और प्रद्युम्न जैसे धुरंधर खिलाड़ी।खैर बाॅलर ने याकरकर डाली मगर ये रहा विराट का शानदार छ्क्का शायद वो अपने दोस्त का बदला ले रहा है।और ये आई अगली गेंद और एक बार फिर शानदार चौका इसके बाद विराट ने एक सिंगल ले लिया और अब पिच पर मौजूद है हमारे बेहतरीन बल्लेबाज ये आई गेंद और गई बाउंड्री वॉल के बाहर जियो मेरे शेर।"
अगले तीन-चार ओवरों तक प्रद्युम्न और विराट ने शानदार प्रदर्शन किया।
मोहन ने कमेंट्री करते हुए कहा।
खैर ध्रुव भी बाकी टीम के साथ मैच देख रहा था लेकिन अचानक ही अगली बाॅल पर विराट ने कैच उठा दिया जो सीधे आॅफ पिच पर लगे फिल्डर के हाथ में आ गई।और इस तरह एक सौ पाँच रनों पर पहले विकेट के साथ विराट को वापस दर्शकों के बीच लौटना पड़ा।
"और हमारे अगले बल्लेबाज है अरविंद जी जिन्होंने आते ही बाॅल को बाउंड्री वॉल के बाहर का रास्ता दिखा दिया।पर ये क्या अगली फुलटाॅश बाॅल पर प्रद्युम्न ने सीधा कैच दिलीप के हाथ में पकड़ा दिया खैर अब उनकी जगह हमारे टीम के हल्क विनीत आ रहे हैं और ये क्या मुझे तो लग रहा है बाॅलर को स्टम्प ही नहीं दिख रही होगी।विनीत मेरा सुझाव है कि तुम्हे ऐडी पहन लेनी चाहिए वरना आज की रात तुम पर भारी गुजरेगी।"
"मोहन!कमेंट्री करो बकवास नहीं।"
"जी सर मैं करता हूँ!क्रीज पर मौजूद हैं इस वक्त अरविंद जी जो सम्हल कर खेल रहे हैं और सिंगल या डबल निकालने की कोशिश कर रहे हैँ पर दिलीप की लगातार गुड लेंथ की बाॅलिंग की वजह से वो कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं।"
खैर अगली बाॅल पर अरविंद ने सीधा कैच दे दिया लाँग आॅन पर मौजूद आकाश के हाथों में और आकाश की टीम आराम से जश्न मनाने लगी।
खैर इसके बाद विनीत, वीर और देवेश भी जल्दी ही वापस दर्शकदीर्घा में लौ आये सिर्फ जय ही था जो टिककर खेल रहा था पर चूंकि वो डिफेंडर मोड में खेल रहा था।भरत और प्रशांत ने थोड़ा प्रयास किया मगर अफसोस अगली बाॅल पर प्रशांत को दो रन लेने के चक्कर में पवेलियन लौटना पड़ा।
पंद्रहवा ओवर खत्म होते-होते एक सौ शाठ रन बन चुके थे।
"और अब जय भाई हमेशा की तरह सिंगल निकाल कर भरत को खेलने का मौका दे रहा है और भरत ज्यादा से ज्यादा रन जोड़ने की कोशिश कर रहा था।"
बहरहाल सोलहवें ओवर की पहली बाॅल पर विकेट कीपर ने आराम से भरत को स्टम्पिंग करके वापस भेंज दिया और अब ध्रुव की टीम को जीतने के लिए तेईस बाॅल पर पैंतीस रनों की आवश्यकता थी।
"साॅरी ध्रुव भाई पर अब तुम्हें ही जाना पडे़गा क्योंकि अक्षय अभी खेलने के हालत में नहीं है।"
प्रद्युम्न ने चिंतित स्वर में कहा जबकि ध्रुव के हाथ पैर फूल रहे थे लेकिन इसकी वजह आकाश नहीं बल्कि इति थी।वो इति के सामने खुद को अनाड़ी साबित नहीं करना चाहता था।
"तुम टेंशन मत लो सिर्फ पैंतीस रन चाहिए और जय अभी पिच पर ही है वो सब सम्हाल लेगा बस तुम विकेट बचाना।"
अरविंद ने उसे समझाया और सांत्वना देकर पिच पर भेंज दिया।
"मर जाना लेकिन हारना मत!"
विनीत ने जोश भरे स्वर में कहा।
"और अब पिच पर आ रहे हैं हमारे टीम के नये और उभरते सितारे ध्रुव।बेचारे को एक लड़की घास नहीं दे रही है पता नहीं आजकल की लड़कियों को हो क्या गया है?मैं लड़की होता तो अबतक तो इसे प्रपोज कर दिया होता...."
"मोहन!बकवास बंद करो और कमेंट्री करो!"
"जी सर मैं तो बस अतिरिक्त जानकारी दे रहा था।तो पिच पर अभी भी हमारे दो शेर मौजूद हैं और जीतने के लिए हमारी टीम को बस पैंतीस रनों की जरूरत है।विरोधी टीम के कप्तान ने जानबूझकर एक फ्लिप ध्रुव के आगे लगा दिया और ये सौरव ने डाली ध्रुव को पहली बाॅल.... ओह  शार्ट पिच गेंद और ध्रुव जी बाल-बाल बचे।और अगली गेंद भी शानदार गुगली रही स्टम्प उड़ते-उड़ते बचा बेहद करीबी मामला था दोस्त।सौरव जानबूझकर उसके सामने शार्ट पिच गेंदें डाल रहा है सौरव डरपोक कहीं के!"
उत्कर्ष और मोहन कमेंट्री कर रहे थे वहीं ध्रुव पूरा एक ओवर झेल गया और अगली बाॅल के सामने जय था जबकि दिलीप बाॅल डालने वाला था।
"और ये दिलीप ने अगली बाॅल सीधे जय के बल्ले पर दे दी और बाॅल हवा में और एक बार फिर बाउंड्री के बाहर।आकाश की टीम को मैं ये सलाह दूँगा कि ऊपर वाले आकाश की ओर मुह खोलकर न देखें वरना अगर किसी कौये ने बीट कर दिया तो भारी नुकसान हो जायेगा।खैर दिलीप को देखकर लग रहा है जैसे उन्होंने अपनी पहली गेंद से सबक ले ली है गुड लेंथ पर बाॅल डाल कर चार गेंदे लगातार बीट करा चुके हैं पर अगली बाॅल जय ने आॅफ साइड की ओर घुमा दिया और जल्दी ही दोनों ने दो रन पूरे कर लिए।इस तरह बारह गेंदों पर पंद्रह रन और चाहिए जबकि क्रीज पर जय मौजूद हैं और अगला ओवर डालने आ रहे हैं खतरनाक जल्लाद सौरव।"
"मोहन!"
विजय सर ने थके अंदाज में उसे फटकारा और दोबारा उनकी आँखें पिच पर गड़ गईं जबकि दर्शकदीर्घा में बैठे हर शख्स की नजर पिच पर थी इति की भी।
"तो अब मैच ने खरनाक मोड़ ले लिया है और ये सौरव ने पहली ही बाॅल बाउंसर डाली जो जय की खोपड़ी के दो इंच दूर से निकल गई काश जय अपना बैट इसके सिर पर पटक दे।"
"उत्कर्ष!"
"मैं तो मजाक कर रहा था सर!तो अब मैच बहुत ही रोमांचक मोड़ पर है जय ने अगली लेग कटर बाॅल लेग बाउंड्री की ओर घुमा दी और दो रनों के लिए दौड़ पड़े बहरहाल उन्हें तीसरा रन लेने का मौका नहीं मिला और शायद वो एसा चाहते भी नहीं हैं क्योंकि ध्रुव को क्रिकेट खेलना नहीं आता और शायद इसीलिए जय नहीं चाहता कि ध्रुव का बाॅल से ज्यादा आमना समना हो।"
उत्कर्ष और मोहन कमेंट्री के बजाय मैच देखने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे थे।
वहीं दर्शकदीर्घा में मौजूद हर शख्स ने सांसें रोक रखी थी।
सौरव ने ओवर की लास्ट बाॅल गुगली फेंक दी और जय सिंगल नहीं ले पाया।
"भाई अब मैच फँस गया है अगली ओवर आकाश डालने आ रहा है और वो जरूर कुछ न कुछ करेगा।एक ओवर में नौ रन चाहिए तुम किसी भी तरह एक सिंगल निकाल लो बाकी मैं देख लूँगा।"
जय ने उसे समझाया।
"यार मैं क्रिकेट कभी नहीं खेलता था मुझे तो बस फुटबाल खेलना आता था।"
ध्रुव ने निराशा भरे स्वर में कहा।
"कोई बात नहीं भाई बस समझो ये बाॅल ही फुटबॉल है लेकिन बस तुम्हें किक करने के बजाए इसे बैट मारना है।"
"ठीक है मैं कोशिश करता हूँ। "
ध्रुव ने कहा और क्रीज की ओर चल पड़ा जबकि कमेंट्री छोड़ के उत्कर्ष और मोहन के साथ बाकी सब भी सांसे रोके मैच देख रहे थे।
क्रीज पर पहुंच कर ध्रुव ने चारों ओर की फील्डिंग को गौर से देखा और फिर उसने सिर्फ एक पल के लिए इति पर निगाह डाली जिसके दोनों हाथ उसकी गोद में थे और आपस में गुँथे हुए थे।
वहां से नजरें हटाकर उसने सामने बाॅल डालने के लिए तैयार आकाश की ओर देखा जिसकी आँखें दुर्भावना से चमक रही थीं।
उसने बैट जमीन से लगाया और...
धाड़!
अगले ही पल बाॅल उसके सीने पर आ लगी और उसकी आँखों में आँसू आ गए।वो अपनी ओर दौड़कर आती भीड़ को नहीं देख सका और बैट छोड़कर घास के मैदान पर बैठ गया।उसकी आँखें बंद थीं और उसका हाथ उसके पसलियों पे था जिसे जय और प्रद्युम्न मिलकर हटा रहे थे।
"तुझे रिटायर हो जाना चाहिए!"
कुछ देर बाद प्रद्युम्न ने उसे सलाह दी।
"नहीं!मैं खेल रहा हूँ।"
ध्रुव ने दांत पीसते हुए कहा और खड़े होने की कोशिश करने लगा।
"उसकी ओर मत देखना!"
बाकी टीम और टीचर के दर्शकदीर्घा में लौटने के बाद बैट पकड़ते हुए उसने बार-बार दोहराया।
"तुम ठीक हो भाई?"
जय ने उससे पूछा।
"हाँ!"
उसने लापरवाही से कहा और एक बार फिर दोहराया।
"उसकी तरफ मत देखना।"
इतने में आकाश ने जबर्दस्त फास्ट बाॅल डाली पर बाॅल और बैट के टकराने की जोरदार आवाज आई और बाॅल सीधी आकाश के कान से रगड़ खाती हुई बाउंड्री के बाहर निकल गई।
"और ये मारा ध्रुव ने गोल!"
ध्रुव ने खुद गुस्से और लापरवाही से बैठ घुमा कर कहा जबकि आकाश के कान से खून बहने लगा था।पर उसने किसी को भी अपने पास आने से मना कर दिया और किसी बिदके हुए सांड की तरह थोड़ा पीछे जाकर अगला बाॅल डालने के लिए तैयार हो गया।
अगली बाॅल उसने जबर्दस्त शार्ट पिच डाली लेकिन ध्रुव ने तेज गति से बैट घुमा कर बाॅल को ऊँचा उठा दिया और बाॅल सीधे लेग फील्ड पर तैनात दिलीप के हाथों में गिरी और हर तरफ पैना सन्नाटा पसर गया।और कुछ देर बाद प्रद्युम्न और उसकी बाकी टीम ध्रुव को गले लगाने के लिए मैदान में दौड़ती हुई आ रही थी जबकि आकाश के हाथ उसके सिर के पीछे थे और उसके चेहरे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसकी हवा निकाल दी हो वहीं दर्शकदीर्घा में जोरदार शोर गूँज उठा।
दिलीप ने जब नीचे निगाह डाली तो पाया कि वो बाउंड्री पर खड़ा था और इसी तरह ध्रुव के आखिरी सिक्स ने उन्हें तीन बाॅल शेष रहते हुए जिता दिया।
हर तरफ हर्षोल्लास होने लगा जबकि सिर्फ फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स मातम मना रहे थे और आकाश तो बुरी तरह हैरान था।उसे शायद अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी टीम हार चुकी थी।बहरहाल ध्रुव ने भीड़ के ऊपर से इति की ओर देखा ओर उसे हैरानी हुई जब उसने इति के चेहरे पर मुस्कान देखी।
"गजब भाई लास्ट वाली बाॅल पे सिक्स मारना तो मेरे बस की भी बात नहीं थी।"
ध्रुव को कंधे पर बैठाकर घुमाते हुए विराट ने कहा।
"सिक्स कहां मैंने तो बस गोल किया था!"
ध्रुव ने मुस्कराते हुए कहा और सब हँसने लगे।
खैर ध्रुव जल्दी से उस भीड़ में से निकलना चाहता था क्योंकि उसे पता था कि इति को प्रपोज करने का इससे बेहतर और सुनहरा मौका उसे नहीं मिलने वाला था और इसीलिये वो दौड़कर कपड़े बदलने चला गया और जब तक लौटा तब तक देर हो चुकी थी।
"मुझे ये करना ही है!"
ध्रुव ने मन ही मन तय किया मगर अगले कुछ दिनों तक उसे कोई मौका नहीं मिला हर बार किसी न किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर पाता था।
बहरहाल अगले दिन इंस्पेक्शन था और ध्रुव कोचिंग में बैठा एक कागज पर कुछ लिख रहा था जिसका उस हेडिंग से कोई लेना-देना नहीं था जो विनय सर लिखा रहे थे।
और फिर कोचिंग खत्म होने के ठीक पाँच मिनट पहले उसने वो कागज का टुकड़ा मोड़कर शर्ट की जेब में रख लिया।
"मैं तुम लोगों से बाद में मिलता हूँ।"
कहने के साथ ध्रुव अपने दोस्तों को वहाँ छोड़कर तेजी से उस तरफ़ चल पड़ा जहाँ से रोज इति गुजरती थी।
अभी वो मोड़ तक पहुँचा ही था कि इति उसे दिख गई लेकिन इस वक्त इति के अलावा वहां और लोग भी थे और इतनी भीड़ देखकर उसकी हिम्मत जवाब दे गई।उसने लेटर मोड़कर वापस शर्ट की जेब में रख लिया।
"आज चाहे जो हो जाये पर उसे ये लेटर देकर रहूँगा।"
मन ही मन तय किया और वहीं अपने स्कूल की गेट के पास खड़ा हो गया।वक्त धीरे-धीरे गुजर रहा था।
19 अक्टूबर की उस हल्की कंपकंपाती सी ठंड में भी आसमान में सूरज निकला हुआ था जो ठंडक को कुछ कम कर रहा था मौसम बाक़ी दिनों की अपेक्षा आज कुछ ज्यादा सर्द था और हल्की धुन्ध की पर्त चारों ओर फैली हुई थी।
"ध्रुव तू यहां क्या कर रहा है?"
अचानक अपना नाम सुनकर वह थोड़ा चौंक गया पर सामने से आते प्रद्युम्न को देखकर उसकी जान में जान आई।
"भाई आज उसे बोलना है ये अभी नहीं तो कभी नहीं वाला मामला हो गया है।"
ध्रुव ने परेशान स्वर में जवाब दिया।
"जियो मेरे शेर चलो मैं भी तुम्हारे साथ खड़ा हूँ।"
कहने के साथ ही प्रद्युम्न भी उसके पास खड़ा हो गया और दोनों इति के आने की राह देखते रहे।और लगभग दस मिनट बाद इति उनकी तरफ आती दिखाई पडी़।ध्रुव का दिल जोरों से धड़कने लगा।लेटर पकड़े हुए उसके हाथ काँपने लगे।
"दे दे!इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा!"
प्रद्युम्न ने उसे आगे धकेला और उसी समय इति ने ध्रुव को देखा और फौरन उसने पलकें झुका लीं।और बस ध्रुव का सारा काम्फिडेंस एक झटके में गायब हो गया।वो उसे रोकना चाहता था पर उसकी आवाज जैसे उसके गले में ही घुटकर रह गई और तब तक इति आगे निकल चुकी थी।
"मैं नहीं कर पाया!"
आँखों में आँसू भरे हुए ध्रुव प्रद्युम्न की ओर पलटा लेकिन प्रद्युम्न का चेहरा इस वक्त सख्त लग रहा था।
"तू करेगा और आज ही करेगा जाके उसे लेटर दे कर आ।"
प्रद्युम्न ने जोर देकर कहा।
"जल्दी जा तुझे हमारी दोस्ती की कसम!"
प्रद्युम्न ने उसे धकेल दिया और उसके आखिरी शब्दों ने तो मानों जादू कर दिया।जैसे ध्रुव में किसी ने जान फूँक दी हो और वो प्रद्युम्न को वहीं छोड़कर दौड़ता हुआ इति के पीछे चला गया।
उसके दिलो-दिमाग में बस प्रद्युम्न के आखिरी शब्द गूंज रहे थे।
'तुझे हमारी दोस्ती की कसम... '
और प्रद्युम्न यहां अकेला खड़ा रह गया काफी देर बीत जाने पर उसे ध्रुव की चिंता होने लगी इसीलिए वो भी उसके पीछे चल पड़ा पर ध्रुव उसे बीच रास्ते में ही मिल गया और उसने ध्रुव के हैरान-परेशान और उतरे हुए चेहरे को देखकर अंदाज़ा लगा लिया था कि क्या हुआ होगा।
"भाई मैंनें उसे लेटर दे दिया।"
प्रद्युम्न का अंदाजा बिल्कुल गलत था।
ध्रुव ने खुशी से उछलते हुए कहा जबकि प्रद्युम्न कुछ नहीं समझ  पाया।
"क्या?"
"मैनें उसे प्रपोज कर दिया, लैटर उसे दे दिया।"
ध्रुव के आखिरी शब्दों ने प्रद्युम्न पर भी जैसे जादू कर दिया और वो दौड़कर ध्रुव के गले लग गया... To Be Continued In Next Chapter
                                    Written By
                         Manish Pandey’Rudra’

©manish/pandey/15-02-2018

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