Monday, March 12, 2018

Adhoore Panne@Zindgi

                अधूरे पन्ने@जिंदगी
          (अधूरे इश्क़ की पूरी कहानी)

                      अध्याय-नौ
                  बेवफाई का बदला

"तुम मुझे कितना प्यार करते हो?"
इति ने ध्रुव से पूछा जो मोबाइल फोन कानों से लगाये तेज हवा की बीच घूमते हुए उससे बातें कर रहा था।उसे ठंड और कोहरे की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी जबकि अंधेरे और धुन्ध से घिरे उस बड़े मैदान मैं अकेले टहलते हुए उसे देखकर शायद लोगों को उसके प्रेत होने की गलतफहमी हो सकती थी।
"यार मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ इतना कि शब्दों में कहना मुमकिन नहीं है।"
उसने गंभीरता से जवाब दिया और दूसरी ओर से इति के हँसने की आवाज आई।
"क्या हुआ?"
ध्रुव ने चिंहुक कर पूछा।
"कुछ नहीं पर आप बातें कितनी अच्छी बनाते हो।"
उसने मासूमियत से जवाब दिया।
"अच्छा लेकिन मैं सच कह रहा हूँ।"
इति की बात सुनकर ध्रुव ने व्यंग्य भरे लहजे में कहा।
"तो मैं कब कह रही हूँ कि आप झूठ बोल रहे हो मैं तो बस आपकी तारीफ कर रही थी।"
"अच्छा!"
"हाँ!और बताओ क्या कर रहे हो वहाँ अकेले-अकेले?"
इति ने पूछा।
"कुछ खास नहीं बस आपको याद कर रह हूँ।अच्छा एक बात बोलूँ?"
उसने संकोच से भरे लहजे में सवाल किया।
"हाँ!"
"आपको पता है जिस दिन आप बाल बाँधे बिना स्कूल आती थीं एकदम कयामत लगती थीं।और जब भी मैं आपको ऐसे देखता था मेरा मन करता था कि.... "
बोलते-बोलते ध्रुव रुक गया।
"क्या मन करता था?किस करने का?"
इति ने हल्के-फुल्के और सामान्य अंदाज में पूछा।
"हाँ!"
ध्रुव ने शर्माते हुए कहा।
"तो कर लेते यार मुझसे कैसी शर्म मैं तो आपकी गर्लफ्रेंड हूँ।"
"हाँ!वो तो है।"
"यार मैं थोड़ी बेशर्म टाइप की हूँ और मेरे साथ रहकर आप भी ऐसे ही बन जाओगे बस कुछ टाइम और रुको।"
कहने के साथ ही दोनों हँसने लगे और इसी तरह की लंबी बातचीत के दौरान अचानक इति को कुछ याद आया।
"अच्छा हाँ सुनो आप प्लीज़ मेरा एक काम कर दो!"
"क्या?"
ध्रुव ने हैरानी से पूछा।
" अर.... यार हमे हमारा मकान जल्दी से जल्दी खाली करना है तो प्लीज़ आप कोई अच्छा मकान ढूंढ दो और हाँ कल घर पे चले जाना मम्मी को आपसे कुछ बात करनी है।"
इति इतना सबकुछ एक साँस में बोल गई जबकि ध्रुव बुरी तरह हैरान-परेशान था।
"क्या?आपकी मम्मी को क्या बात करनी है?"
"पता नहीं पर आप चले जरूर जाना प्लीज़!"
"ओके!"
"ठीक है कल भूलना मत ओके बाय और आई लव यू।बाय!"
"लव यू बाय!"
ध्रुव ने कहने के साथ ही उसने काॅल डिस्कनैक्ट कर दिया और इधर ध्रुव हैरान होकर इधर-उधर टहलते हुए सोंचने लगा कि ऐसा कौन सा काम पड़ गया जो इति की मम्मी ने उसे घर बुलाया था जबकि उसे हमेशा लगता था कि वो उसे जरा भी पसंद नहीं करती थीं।
खैर इसका जवाब उसके दिमाग में दूर-दूर तक नहीं सूझ रहा था और इसीलिए हार मानकर वह अपने घर की ओर बढ़ गया।और देर रात तक इन्हीं बातों को सोंचता हुआ आखिरकार ध्रुव सो गया।
"तुम कहाँ हो मैं स्कूल के गेट पर खड़ा हूँ!"
अगले दिन स्कूल के गेट के बाहर खड़े जय ने फोन पर ध्रुव से पूछा।
"बस भाई आ गया पीछे मुड़कर तो देखो।"
ध्रुव ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए हाथ हिलया और दोनों एक दूसरे से ऐसे गले मिले जैसे बरसों के बिछड़े हों।"
"क्या हुआ प्रतीक का काॅल आया था अर्जेंट स्कूल पहुँचों और अभी तो स्कूल का टाइम भी नहीं हुआ है।"
ध्रुव ने हैरान दिखते हुए जय से सवाल किया बहरहाल वो भी उतना ही हैरान था जितना कि ध्रुव खुद।
"मुझे भी नहीं पता उसने मुझसे भी यही कहा और मैं फौरन भागा चला आया।"
"ओह!"
ध्रुव ने कुछ सोंचते हुए कहा।
"मुझे तो वो काफी परेशान सा लगा था।"
"मुझे भी।"
अभी दोनों बातें कर ही रहे थे कि तब तक प्रतीक आ गया।
"क्या हुआ हमें अर्जेंट यहाँ क्यों बुलाया था?"
दोनों ने एक साथ कोरस में पूछा।
"अर.... गुंजन के घर के बाहर बहुत भीड़ है मुझे डर लग रहा है।"
प्रतीक ने भर्राये गले से जवाब दिया जबकि बाकी दोनों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
"हुआ क्या?और देवांश कहा है?"
ध्रुव ने उससे सवाल किया।
"गाँव गया है!"
प्रतीक ने उन्हें बताया।
"मुझे डर लग रहा है यार कहीं उसे कुछ हो न गया हो?"
प्रतीक नें रुँधे हुए स्वर में कहा और फौरन जय ने मजबूती के साथ उसका कंधा पकड़ लिया।
"तू ये सब क्यों कह रहा है भला उसे कुछ क्यों होगा?"
जय और ध्रुव दोनों ने उससे सवाल किया क्योंकि उन्हें जरा़ भी अंदाजा नहीं था कि प्रतीक क्या और क्यों कह रहा था।
"उसके घर चलके देखना है।"
प्रतीक ने आगे बढ़ते हुए कहा और दोनों ने पहले एक दूसरे की ओर देखा और फिर उसके पीछे चल पड़े।
"गुंजन मर गई थी।"
अगले एक घंटे में यह खबर पूरे स्कूल में आग की तरह फैल गई थी।जबकि ध्रुव और उसके दोस्तों को तो जैसे इस बात का भरोसा भी नहीं हो पा रहा था और प्रतीक का तो बहुत ही बुरा हाल था।
देवांश खबर मिलते ही उल्टे पैर गाँव से लौट आया।
सभी लोग स्कूल के बड़े हाॅल में इकट्ठा थे।
हर कोई आपस में इसी बात पर चर्चा कर रहा था और हर एक के ज़ुबान पर इस बारे में एक अलग ही कहानी थी।
"बच्चों!"
बेहद शाँत और दुखी लग रहे हेडमास्टर उपाध्याय जी स्टेज पर आगे आकर बोलने लगे।
"अभी कुछ ही देर पहले हमें सूचना मिली है कि कई सालों से हमारे और आपके बीच रहने वाली पढ़ने वाली हाईस्कूल की एक बालिका का निधन हो गया है।जैसा कि डॉक्टरों ने बताया टायफाइड की वजह से उसकी मृत्यु हो गयी है और यह बेहद ही कष्टकारी है इसलिए मैं चाहता हूँ कि आज हम अभी उस बालिका  के लिये दो मिनट का मौन रखेंगे और फिर अपने-अपने घर जायेंगे।"
इतना बोलने के बाद सभी ने दो मिनट आँखें मूँद कर गुंजन के लिए प्रार्थना की और फिर सब घर चल पड़े।
इसके बाद अगले कुछ दिनों तक पूरे क्लास का माहौल काफी निराश और गम से भरा हुआ रहा।
प्रतीक हमेशा रोते रहता था और ध्रुव के साथ-साथ बाकी सब हमेशा उसे समझाने की कोशिश करते की अब जो हो चुका था उसे बदलना नामुमकिन था।
कहते हैं कि वक्त हर घाव को भर देता है।माना कि प्रतीक के दिल का ये घाव आसानी से भरने वाला बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी गुजरते वक्त के साथ और उनके बोर्ड पेपर्स के फाइनल लैब प्रैक्टिकल्स की भागदौड़ ने उसके दर्द को कुछ कम कर दिया था उसका ध्यान कहीं और मोड़ कर।
इसी बीच इति भी वापस स्कूल आ चुकी थी पर ध्रुव को इससे ज्यादा खुशी नहीं हुई थी।बहरहाल उसकी खुशी ज्यादा देर नहीं ठहर पाई।
इस दौरान इति स्कूल कम ही आती थी और आती भी थी तो उसे बुरी तरह इग्नोर करती थी।जब तक कि कोई रीचार्ज करवाने जैसा जरूरी काम न हो वो उसे काॅल भी नहीं करती थी और सबके बारे में सोंच-सोंच कर ध्रुव का मन कर रहा था कि वो अपने सिरके बाल नोंच ले या खुद को गोली मार दे।
"हाय!"
एकदम सुबह-सुबह इति की बड़ी बहन ममता ने उसे मैसेज किया।
"बाय!मूड आॅफ है बाद में बात करते हैंं।"
ध्रुव ने टका सा जवाब दिया।
"क्या हुआ मेरी बहन को लेकर परेशान हो?"
ममता ने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया।
"हाँ!मैं बस यही जानना चाहता था कि वो ऐसे क्यों बिहेव कर रही है?यार शुरू में तो अच्छे से बात करती थी।हमेशा काल्स और मैसेजेस करती थी और अब ऐसे क्यों बात करती है जैसे मैं उसका दुश्मन हूँ?मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर गाँव जाने के बाद वो इतना बदल क्यों गई है?"
ध्रुव ने अपने दिल की सारी भडा़स निकाल दी और अपनी परेशानी का सबब उसने ममता को भी बता दिया।
"अरेरे!वो ऐसी ही है तुम उसकी चिन्ता मत करो!वो बचपन से ही कमीनी है बस तुम्हें पता नहीं चला पहले।शुरू में तो अच्छा बनने का बहुत नाटक किया उसने पर आखिर में उसने अपना रंग दिखा ही दिया।"
"आट कहना क्या चाहती हो और यार कैसे चिन्ता ना करूँ मैं उसे जान से ज्यादा प्यार करता हूँ लेकिन वो शायद जबर्दस्ती हमारे रिस्ते का बोझ उठाए हुए है ऐसा लगना लगा है मुझे।मैं मर जाऊँगा उसके बिना, ये छोटी सी बात उसे समझ में क्यों नहीं आ रही है।"
"अरे आप ऐसी बात क्यों कर रहे हैं?एक बात बताऊँ अगर इति से नहीं कहेंगें वादा करिए तो।"
ममता ने अचानक जानबूझकर बातचीत को रहस्यमय बनाते हुए कहा।
"अर्... बोलिये?"
सकपकाया सा ध्रुव बस इतना ही कह पाया।
"इति आपसे नहीं किसी और से प्यार करती है।"
ममता ने धीमी और गहरी आवाज़ में कहा पर उसके शब्द बिल्कुल साफ थे और ममता की जुबान से ये शब्द सुनते ही उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी बहुत गहरा धक्का लगा था उसे।
ऐसा लग रहा था जैसे अभी रो पडे़गा।
"क.....क.....क्या कहा किसी और से करती है।किससे?पूरी बात बताइए!"
उसने खुद को सम्हालते हुए कहा।
"वो लड़का पहले हमारे घर के पास ही रहता था इति और वो दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे यहाँ तक कि शादी भी करना चाहते थे और जहाँ तक मुझे याद है साहिल नाम था उसका।"
ममता ने कुछ सोंचते हुए कहा।
"श.....शादी?"
"हाँ मम्मी भी जानती हैं उसके बारे में और वो अक्सर हमारे घर पे आता था।और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इति तो हमेशा फेसबुक पे भी लड़कों से चैटिंग करती है।दिन भर लड़कों से बात करती रहती है।"
ममता धीरे-धीरे करके कई रहस्य की पर्तें खोल रही थी।ध्रुव को तो उसकी आवाज़ कहीं दूर से आती महसूस हो रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे कई सालों से उसने पानी की एक बूँद भी न पी हो।उसे याद था कि पहले जब भी इति से वह पूछता था कि वो फेसबुक चलाती है या नहीं तो उसने हर बार साफ इंकार कर दिया था पर अभी पिछले हफ्ते ही किसी कारण से ध्रुव को अपनी फेसबुक आईडी के बारे में बताया था।उस दिन जैसे-जैसे इति के बारे में उसकी बहन बताती जा रही थी उस लड़के को लग रहा था कि वो तो इस इति को जानता ही नहीं था बल्कि वो इति जिसे वो जानता था और बेपनाह प्यार करता था वो तो कोई और ही थी।उसे तो अब मालूम पड़ा था कि उसे जिस इति से प्यार हुआ था वो तो बस एक छलावा थी।इति और उसकी सच्चाई तो कुछ और ही थी।
खैर ममता का फोन कट करने के बाद उसने बिना सोंचे इति को फोन लगा दिया और कई बार काॅल करने के बाद आखिरकार जब इति ने उसका फोन उठाया तो वो बेहद गुस्से में था।
"आप प्यार करती हो मुझसे?"
उसने सीधे सपाट लहजे में पूछा।
"क्या यार तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या जब देखो यही सब नौटंकी करते हो।"
इति ने अपने ही टोन में कहा।
"करती हो या नहीं?"
बिना उसकी बात पर ध्यान दिये ध्रुव ने दोबारा वही सवाल दोहराया।
"तुम पागल-वागल हो गये हो क्या कितनी बार बताया है करती तो हूँ अब क्या सारे मोहल्ले को बता दूँ।"
इति ने तीखे स्वर में जवाब दिया।
"हाँ!मैं अपने घरवालों को हमारे बारे में बताने जा रहा हूँ तुम भी बताओ अभी।"
ध्रुव ने जोरदार लहजे में कहा।
"तुम्हारा दिमाग खराब है क्या ऐसे कैसे बता दूँ।"
इति ने बात सम्हालते हुए कहा।
"मुझे पता था यही जवाब दोगी और दिमाग तो अब सही हुआ है मेरा।तुम्हारी खुद की बहन ने सब बता दिया है तुम्हारे बारे में।"
कहने के साथ ही ध्रुव ने उसे अपनी और ममता की पूरी बातचीत के बारे में बता दिया।
"आज पता चल ही गई तुम्हारी हकीकत भाड़ में जाओ और दोबारा मुझे फोन या मैसेजेस मत करना।"
ध्रुव ने रुँधे हुए गले से चीखकर कहा।
"हे तमीज से बात करो और पहले सच्चाई जान लो फिर ब्लेम करो!तुमने ये कहा कैसे?भाड़ में तुम जाओ समझे।मुझे नहीं पता ममता ने तुमसे क्या-क्या कहा पर एक दिन मैंनें उससे कहा था कि तुम्हें मुझपे बहुत भरोसा है और उसने शर्त लगाया था कि वो तुम्हारा भरोसा कम कर देगी।"
इति ने बेहद आत्मविश्वास भरे लहजे में दृढ़ता से जवाब दिया और ध्रुव एकदम से सन्न रह गया।उसका दिमाग ही नहीं काम कर रहा था कि किसकी बात सच माने और किसकी झूठ।
दिल कह रहा था कि इति कि बातों में सच्चाई थी और दिमाग़ बार-बार पूछ रहा था कि आखिर उसकी सगी बहन ही उसके बारे में इतना अनाप-शनाप क्यों बोलेगी पर अगले ही पल उसके दिल ने दिमाग को यह कहकर चुप करा दिया कि शायद वो अपना रास्ता साफ करना चाहती हो।
दिल और दिमाग की इस लड़ाई में ध्रुव का मासूम दिल जीत गया और वो हमेशा कि तरह उस गलती के लिए इति से माफी मांगने लगा जो उसने कभी की ही नहीं थी।
"साॅरी इति जी मुझे नहीं पता था कि वो ऐसे झूठ बोलेगी।"
उसने गिड़गिडा़ते हुए कहा।
"साॅरी माय फुट दोबारा फोन मत करना।"
कहने के साथ ही इति ने फोन रख दिया और फिर स्विच आॅफ भी कर दिया।ध्रुव गिड़गिडा़ता रहा तड़पता रहा और बंद कमरे में घंटों आँसू बहाता रहा।बार-बार खुद को कोसता रहा पर उसका दर्द महसूस करने वाला या बाँटने वाला उस वक्त कोई नहीं था।
खैर अगले कई दिनों तक ध्रुव उदास दिखता रहा जबकि उत्कर्ष अमित जय वीर और प्रतीक की हालत भी वैसी ही थी।
उस दिन उनका आखिरी फिजिक्स का फाइनल प्रैक्टिकल हो रहा था और बाहर से कुछ इक्जामिनर्स आये थे जो एक-एक करके सबका वायवा ले रहे थे।
"क्या हुआ था ध्रुव भाई अब तो बताओ?"
जय ने उससे सवाल किया और बदले में ध्रुव ने उसे सबकुछ बता दिया।
"यार मैं तो उसकी बहन को ठीक समझता था और वो इतनी बड़ी कमीनी निकली।"
जय ने हैरानी से कहा जब बाकी सब एक-एक करके वायवा दे रहे थे।
"साला दोनों बहनें मिलकर मेरी जिंदगी से खेल रही हैं फुटबाल बन गई है मेरी जिंदगी और ऊपर से उसकी माँ।मोटी भैंस कहीं कि दिन भर भैंस की तरह चरती रहती है और फिर आराम से बिस्तर पर बैठकर जुगाली करती रहती है।"
ध्रुव ने अपने दिल का गुबार निकालत कर रख दिया।
"तुम्हें पता है मुझे उस दिन उसकी मम्मी ने घर क्यों बुलाया था असल में उनके यहाँ कोई दस साल पुराना कम्प्यूटर रखा था वो भी बिना सीपीयू के भगवान जाने ठीक था या खराब पर बाबा आदम के जमाने का था और वो मोटी भैंस चाहती थी कि मैं उस डिब्बे को बिकवा दूँ सालों ने कबाड़ीवाला बना कर रख दिया।लानत है ऐसी जिंदगी पे अबे कोई सनकी भंगार वाला फ्री में भी न लेता वो सामान और सालों को उसके पैसे चाहिए थे।"
"भाई अब ये कुछ ज्यादा कर दिया उन सबने!"
जय ने तैश में आकर कहा।
"अरे कहानी तो अभी शुरू हुई है तुम्हें पता है, एक दिन इति के कहने पर मैं उसके छोटे भाई को घुमाने लेकर गया सोंचा कुछ चाट-समोसा खिला दूँगा और इसी बहाने अपने साले से भी पहचान बना लूँगा।पता है साले ने क्या किया शहर के सबसे बड़े रेस्टोरेंट में लेके गया मुझे और चार सौ रुपए पीस वाला चाकलेट केक आर्डर कर दिया।यार आज तक मैंनें पाँच रुपये की पर्क चाकलेट से मँहगा कोई चाकलेट खाया ही नहीं और उसे वही केक खिलाना पड़ा जिस तरह वो केक के टुकड़े को खा रहा था मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरी किडनी खा रहा हो धीरे-धीरे करके।उसके बाद भी कमीने ने एक कोल्ड-ड्रिंक का कैन और ऊपर से चार पैकेट चिप्स भी ले लिया।बर्बाद कर दिया कमीने ने मुझे।"
ध्रुव अपने दिल की भड़ास निकाल रहा था और आसपास बैठे उसके दोस्त भी खिसक कर उसटे नजदीक आ रहे थे ताकि उसकी पूरी बात सुन सके।
बहरहाल आगे वह कुछ कहता या जय कुछ बोलता दोनों को एकसाथ लैब में बुलाया गया।
इसी बीच ध्रुव ने फोन चेक किया और पाया कि इति का मैसेज आया था जिसमें लिखा था स्कूल के बाहर मिलो थोड़ी देर बाद।अचानक काफी दिनों बाद उसका मैसेज देखकर वह हैरान रह गया जबकि कई दिनों से इति स्कूल भी नहीं आ रही थी।
इसके बाद न तो उसका मन प्रैक्टिकल करने में लगा और न ही वायवा देने में।
उसने तेजी से किरचाफ के धारा के सारे नियम इक्जामिनर्स को बताया और समझाया ताकि वह जल्दी से जल्दी स्कूल के बाहर निकल सके और आखिरकार पंद्रह मिनट बाद वह इसमें कामयाब हो ही गया और लैब से निकलकर सीधे बाहर गेट की ओर भागा जहाँ पंद्रह मिनट तक इंतजार करने के बाद उसे इति दिखाई पड़ी जो कि अपनी छोटी बहन को साथ लेकर आ रही थी।
"हाय!"
"हाय!यहाँ क्यों बुलाया?"
ध्रुव ने पूछा।
"ऐसे ही बस मिलने के लिए।"
"हुम्म्!"
"तुमने दाढ़ी क्यों बढ़ा ली है इतनी?"
इति ने हैरानी से पूछा और जवाब देने के पहले ध्रुव ने मुस्कुरा दिया।
"अब प्यार में धोखा खाने के बाद लड़का दाढ़ी नहीं बढ़ायेगा तो करेगा क्या?"
ध्रुव ने तंज कसा।
"यार मैंनें धोखा नहीं दिया।अच्छा ये सब जाने दो कल या परसों शायद नेहा ने बताया कि तुमने दाढ़ी-वाढी़ काफी बढ़ा ली है और ऐसे बहुत अच्छे लग रहे हो तो सोंचा मिल लूँ और मैं भी देख लूँ।"
इति ने उसकी तारीफ करते हुए कहा जबकि ध्रुव शर्माने लगा।
बहरहाल इसके बाद एक बार फिर से उनकी बातचीत होने लगी।और लगभग एक हफ्ते तक तो सब कुछ ठीकठाक चलता रहा।और जब उसे लगने लगा कि अब उसकी लाइफ में सबकुछ अच्छा चल रहा था तभी एक दिन अचानक ध्रुव की जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया जिसने उसे बुरी तरह हिला कर रख दिया।
"भाई!ध्रुव भाई।"
जय हाँफते हुए ध्रुव के पास आया और उसे इस तरह आते देख वो बुरी तरह हैरान रह गया था।
"मुझे मालूम है कि एक हफ्ते बाद हमारा बोर्ड इक्जाम शुरू होने वाला है और स्कीम भी है मेरे पास तो इसमें इस तरह परेशान क्यों हो रहे हो?"
बुरी तरह हैरान दिख रहे ध्रुव ने उससे सवाल किया।
"अरे भाई ये इक्जाम के बारे में नहीं है बल्कि इति के बारे में है।"
ध्रुव एक बार फिर से बुरी तरह हैरान और परेशान नजर आने लगा पर उसने बीच में कुछ बोलना ठीक नहीं समझा और उसे चुप देखकर जय ने आगे कहना जारी रखा।
"भाई एक लड़का अमित से इति के बारे में पूछा रहा था और बोल रहा था कि उसने फँसाया हुआ है इति को।उसने बताया कि इति खुद उससे चैट करती है फेसबुक पर और न जाने क्या-क्या बोला।"
जय ने उसे सबकुछ एक साँस में बता दिया और अमित ने भी अपनी स्वीकृति दे दी जिसके बाद ध्रुव का खून खौलने लगा।
"कौन था ये कमीना?"
ध्रुव ने दाँत पीसते हुए पूछा।
" अर... पहले हमारे स्कूल में पढ़ता था अभी पिछले साल ही इंटर पास-आउट हुआ है अमित मिश्रा नाम है।"
जय ने उसे पूरी जानकारी दी और इसके बाद ध्रुव की बस एक ही अच्छा थी कि उस अमित मिश्रा का सर वो अपने हाथों से फोड़ सके बस।
खैर कुछ भी करने से पहले वो इति से बात कर लेना चाहता था।
"क्या हुआ?आज हम लोगों के लिए स्कूल में फेयरवेल पार्टी रखी गई है और तुम लोग अभी तैयार भी नहीं हुए?"
प्रद्युम्न ने गुस्से भरे लहजे में सवाल किया।
"अर... वो इति...."
"अर कुछ नहीं हम बस तैयार हैं।"
ध्रुव ने जय की बात बीच में काट दी और इशारे से उसे कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
"ओके तुम दोनों जल्दी आओ बाकी सब बाहर इंतजार कर रहे हैं।"
कहने के साथ ही प्रद्युम्न बाहर चला गया।
"उसे बताने से क्यों रोक दिया मुझे?"
"इस मैटर को मैं खुद हैंडल करना चाहता हूँ।"
ध्रुव ने निश्चय भरे स्वर में कहा और वो भी कमरे से बाहर निकल गया।
गोरे चेहरे पर भरी हुई काली दाढ़ी उस पर बेहद अच्छी लग रही थी यहाँ तक कि जबसे उसने बालों को तिरछा करने के बजाए सीधे पीछे रखना शुरू किया था वो और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।
कसी हुई जींस और उस पर बेहद स्टाइलिश सफेद शर्ट और काली हाफ जैकेट डाले हुए जैसे ही वो कमरे से बाहर निकला सभी की नजरें उसी की ओर मुड़ गईं।
"वाह भाई हैंडसम लग रहे हो!"
शिवन्या ने उसकी तारीफ करते हुए कहा और शर्म से उसके गाल गुलाबी पड़ गए।
उस दिन फेयरवेल पार्टी में उन्होंने काफी इंजॉय किया और जमकर फोटोज लिए पर ध्रुव जल्दी से जल्दी वहाँ से निकलना चाहता था ताकि वो इति से बात कर सके।पर इति कब निकल गई उसे पता भी नहीं चला और उसकी बात इति से शाम को फोन पर ही हुई।
"हैलो!अमित को जानती हो?"
ध्रुव ने सीधे-सीधे उससे सवाल किया।
"मैं नहीं जानती ओके!"
इति ने टका सा जवाब दिया।
"तुम्हारा फेसबुक फ्रेंड है"
"ओह!हाँ एक है अमित मिश्रा उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया है लेकिन कभी उससे बात नहीं हुई।"
"फिर झूठ वो साला लोगों को बताते फिर रहा है कि तुम उसकी गर्लफ्रेंड हो।जिस दिन भी मिल गया चीर के रख दूंगा साले को।"
बोलते हुए उसका चेहरा गुस्से में भभकने लगा।
"जो करना है करो यार मुझे नहीं पता।"
"वो तो मैं करूंगा ही पहले तुम उसे ब्लॉक करो।"
ध्रुव ने जोरदार आवाज में कहा।
"मेरे में आप्शन नहीं है ब्लॉक का।"
"अच्छा मार्क जुकरबर्ग ने तुम्हारे लिए कोई स्पेशल एकाउंट बनाया है क्या!"
ध्रुव ने उसका मजाक उड़ाया।
"तुम मेरा दिमाग मत खराब करो।"
"दिमाग तो तुम मेरा खराब कर रही हो ब्लॉक का आप्शन नहीं है तो आईडी और पासवर्ड मुझे दो मैं कर दूंगा।"
"नहीं दे सकती।"
इति ने साफ इंकार कर दिया।
"क्यों?"
"यार मेरी प्राइवेसी का मतलब क्या रह जायेगा फिर तुम्हें अमित से प्राब्लम है न रुको उसे अनफ्रैंड कर देती हूँ।"
बोलने के बाद इति ने फोन कट कर दिया और दो मिनट बाद दोबारा उसे काॅल किया।ध्रुव ने उसकी काॅल कैंसिल करके खुद काॅल लगाया।
"हाँ हो गया अब खुश।"
इति ने तीखे अंदाज में कहा।
"क्या यार साफ-साफ झूठ बोल रही है तू अभी भी तेरी फ्रैंड लिस्ट मेरे सामने है और छूने किसी को भी अनफ्रैंड नहीं किया है सुन अब सीधे मैटर पे आता हूँ या तो तुम फेसबुक और या फिर मुझे दोनों में से किसी एक को चुन लो"
"क्या हुआ यार दिमाग़ खराब है क्या?"
"मैं कोई एक क्यों चुनूँ और फालतू बात ना करो!"
"साला जो देखो चूतिया बना के निकल जाता है शक्ल पे मेरे चूतिया लिखा है क्या?भाड़ में जाये शराफ़त दिमाग़ मेरा खराब हो गया है"
"तुम्हारा रोज का नाटक हो गया मैं फेसबुक भी नहीं बंद करूंगी और तुम्हें नहीं छोड़ना चाहती।"
"आखिरी बार पूछ रहा हूँ फेसबुक या मैं?"
ध्रुव अपनी बात पर डटा रहा।
"मैं फेसबुक नहीं छोड़ सकती मैं अपनी फ्रीडम नहीं छोड़ सकती तुमको जो करना है करो।"
इति ने एक बार फिर साफ-साफ इंकार कर दिया।
"तो सुन भाड़ में जा तू?"
गुस्से भरे लहजे में कहने के साथ ही उसने फोन पटक दिया इसके बाद इति बार-बार उसे फोन लगाती रही लेकिन उसने इति के किसी भी काॅल का जवाब नहीं दिया।
अगले एक हफ्ते तक वो बार-बार बस इति के बारे मेंसोंच रहा था जबकि इस बार खुद उसने ही इति से रिश्ता तोड़ा था।
दो दिनों बाद उनका बोर्ड का पेपर था और चाहते हुए भी वो अपने इक्जाम पर फोकस नहीं कर पा रहा था और इसका नतीजा यह हुआ कि उनका पहला पेपर जो फिजिक्स का था काफी खराब हो गया।
"उसकी बहन सच कह रही थी साली मुझे शुरू से धोखा दे रही थी।"
एक सुनसान इलाके में नदी पर ऊँचे पुल पर जय के साथ बैठे ध्रुव ने कहा जिसके हाथ में बियर की भरी हुई बोतल थी जबकि आसपास तीन-चार खाली बोतलें और भी पड़ी थीं।
"तो भाई क्या बोलते हो कुछ किया जाए?बदला लिया जाए?"
जय ने वहशी अंदाज में उससे सवाल किया।
"हाँ मैं यही तो चाहता हूँ बदला और इसका इंतजाम भी कर चुका हूँ।"
उसने बियर की घूँट पीकर कहा जबकि जय हैरान था।
"कैसा इंतजाम?"
"मैंने उसके फेसबुक अकाउंट पर लाॅग इन किया था पर मेरे पास पासवर्ड नहीं था इसलिए फाॅरगाट पासवर्ड पर क्लिक कर दिया और चूंकि नम्बर उसके मम्मी का था इसलिए उसके नम्बर पे एक कोड गया होगा पासवर्ड रीसेट करने का जो अभी उसकी बहन मुझे बतायेगी।"
बोलते वक्त ध्रुव की आँखें वहशी अंदाज़ में चमक रही थीं।
"भाई वो कोड देगी?"
जय ने अनिश्चितता से पूछा।
"देगी जरूर देगी।लो आ गया कोड।"
इसके बाद ध्रुव ने इति के एकाउंट का पासवर्ड रीसेट किया और आईडी लाॅग इन की और फिर सीधे उसके मैसेजेस पर क्लिक कर दिया।
एक बटन पर क्लिक होते ही इति का असली चेहरा उन दोनों के आगे आ गया।
"उसे पता तो नहीं चलेगा?"
जय ने उससे सवाल किया।
"कमीनी अभी स्कूल में होगी और पता चलेगा भी तो मेरा उखाड़ क्या लेगी।"
ध्रुव ने भभकते हुए जवाब दिया।
उन दोनों ने एक एक-एक करके उसके सारे मैसेजेस पढे़ और जैसे-जैसे वो मैसेज पढ़ते जा रहे थे उनकी आँखें आश्चर्य से फैलती जा रही थीं और साथ ही उनके चेहरे पर इति के लिए नफरत और घृणा का भाव बढ़ता ही जा रहा था।
एक नहीं दो नहीं पूरे सत्तर लड़के थे जिनसे इति बातें करती थी और उनमें से सिर्फ एक को छोड़कर हर लड़के को उसने ब्वॉयफ्रेंड बना रखा था।
और उनमें सबसे ऊपर जो नाम थे वो थे अंकित सिंह,अमित मिश्रा और योगेश।
ये तीनों लड़के उसी स्कूल के पुराने बैच के स्टूडेंट्स थे जिसमें इस वक्त ध्रुव और इति पढ़ रहे थे।
हालांकि वो इति से तीन या चार साल सीनियर थे पर उनके मैसेजेस देखकर ऐसा लग रहा था जैसे एक ही क्लास में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स हों जो आपस में प्यार करते थे।
ये सब देखकर जय तो सोंच में पड़ गया आखिर कोई लड़की ऐसा कैसे कर सकती है एक साथ सत्तर लड़कों को बेवकूफ बना रही थी आखिर उसका कैरेक्टर क्या था?
"अचानक ध्रुव के दिमाग में झटका सा लगा और एक बार फिर से उसकी आँखों में गुस्सा और वहशीपन झलकने लगा।इसके बाद कई घंटे तक दोनों ने वहीं बैठकर इति की फ्रैंड लिस्ट में मौजूद हर लड़के को जी भर के गालियाँ दीं इतनी भद्दी गालियाँ कि सुनने वाले के कानों से खून बहने लगे यहाँ तक कि ध्रुव ने झोंक में वही गालियाँ इति के रिश्तेदारों को भी दे दी जबकि सबको ये लग रहा था कि इति पागल हो गई थी।
देखते ही देखते इति की फ्रैंड लिस्ट आधे से ज्यादा खाली हो गई।
अभी इससे पहले कि ध्रुव बाकी बचे-खुचे लोगों के साथ भी यही कर पाता अचानक इति का आईडी फिर से पासवर्ड माँगने लगा और उन्हें फौरन समझ में आ गया कि शायद इति ने पासवर्ड चेंज कर दिया था बहरहाल ध्रुव फिर भी खुश था।
अभी दोनों इसी बारे में बात कर रहे थे कि इति का फोन आ गया और ध्रुव ने काॅल अटैंड करके स्पीकर पर डाल दिया।
"तुमने आज जो ये घटिया हरकत की है ये करके तुम साबित क्या करना चाहते हो?"
इति ने साफ लहजे में गुर्राते हुए पूछा।
"कौन सी हरकत और ये क्या बकवास कर रही है तू जब मैंनें बोला था कि दोबारा फोन मत करना तो आज क्यों फोन करके परेशान कर रही है मुझे?"
ध्रुव ने भी कड़क लहजे में ऐसे सवाल किया जैसे उसे कुछ पता ही न हो।
"तुमने मेरी आईडी खोली और सबको गाली दी।"
इति ने रुआँसी होकर कहा।
"हट तेरी तो!सटक गई है तेरी क्या मेरा इक्जाम चल रहा है और नेटपैक भी नहीं है मेरे पास और तेरा पासवर्ड कभी बताया था तूने मुझे?"
ध्रुव ने उसकी की बातों में उसे ही उलझा दिया और इति कुछ सोंचने लगी।
"यार कोई मेरी आईडी हैंग कर लिया है और लोगों को बुरी-बुरी गालियाँ दे रहा है अब मैं क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा?"
इति ने सुबकते हुए कहा।
"ओह इसमें कोई बड़ी बात नहीं क्या तुम्हारे अलावा तुम्हारा पासवर्ड किसी और को पता है?"
ध्रुव ने एक बार फिर उसे घुमाने की कोशिश की।
"हाँ मेरी फ्रेंड है पर वो ऐसा नहीं कर सकती है।"
इति ने उसका बचाव करने की कोशिश की।
"ऐसा तुम सोंचती हो।"
"यार तो अब मैं क्या करूँ?"
अचानक उसकी बात सुनकर एक बार फिर ध्रुव के दिमाग में नयी खुराफात चलने लगी।
"तुम्हें आईडी को सिक्योर करना चाहिए।"
ध्रुव ने जाल फेंका जबकि जय उसकी बात सुनकर हैरान था क्योंकि उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ध्रुव क्या और क्यों कर रहा था।
"यार मुझे नहीं आता आप ही कर दो!"
कहने के बाद उसने ध्रुव को नया पासवर्ड बता दिया और ध्रुव ने जल्दी से आईडी लाॅग इन की और पासवर्ड डालने के बाद आईडी खुलते ही उसने बचे-खुचे लोगों को भी गालियाँ दे डाली।
और दोनों खुशी से उछलने लगे।
"हाँ अब तेरी आईडी सिक्योर हो गई।"
अपना काम पूरा करने के बाद ध्रुव ने उससे फोन पर कहा।
"थैंक्स।"
"अपना थैंक्स अपने सत्तर ब्वॉयफ्रेंड्स को देना जिनकी तू जान है।किसी के लिए तू बिजली डार्लिंग है तो किसी के लिए सोना तेरी जात का.... सुन कमीनी अब तक जितने लोगों को गालियां मिलीं सब मैंनें दी और जो साले बच गए थे तेरी बदौलत दो मिनट पहले उन सबको भी भर-भर के गालियाँ पार्सल कर दी है तुझे जो उखाड़ना है उखाड़ ले।"
ध्रुव ने जोरदार आवाज में हँसते हुए कहा और उसकी बात सुनकर तो जैसे जैसे झटका सा लगा इति को बोलती बंद हो गई बेचारी की।
"मुझे पता था ये सब तुम्हारा ही काम है।"
आखिरकार सदमे से उबरते हुए उसने कहा।
"एक बात बता दूँ मेरी आईडी कोई और चला रहा था किसी ने हैंग कर लिया था मैनें वो सब नहीं किया"
"खेल मत सब पता चल चुका है अब अपने नये ब्वॉयफ्रेंड्स को ये कहानी सुनाना।चल फुट यहां से तू भाड़ में जा सुन तुझसे नफरत करता हूँ मैं चल निकल झूठी कहीं की"
उसने इति को बुरी तरह झिड़क दिया पर वो बार-बार यही कहती रही कि उसका फेसबुक आईडी कोई और चला रहा था।
"जब तू मुझे मैसेज करती थी तब तुझे नहीं पता चली ये बात और आज जब कच्चा-चिट्ठा खुल गया तेरा तो अब तू बोल रही है कि किसी ने तेरी आईडी हैक कर ली थी।अरे कमीनी अब तो शर्म कर कितना नीचे गिरेगी तू।तुझसे अच्छी तो कोठेवाली होती है कम से कम जिससे पैसा लेती है उसको मजा तो देती हैं।साली भाड़ में जा और दोबारा फोन किया तो तेरे बाप के सामने सारे मैसेजेस पटक दूँगा सारा रिकार्ड है मेरे पास।"
कहने के साथ उसने फोन रख दिया और जय के साथ घर की ओर चल पड़ा जबकि इति की हिम्मत भी नहीं हुई की दोबारा उसे काॅल कर ले।
हाँ शाम को इति के एक ब्वायफ्रेंड अंकित का काॅल जरूर आया उसके पास।
"हैलो तुम ध्रुव बोल रहे हो?"
उधर से पूछा गया।
"हाँ तुम कौन?"
ध्रुव ने सवाल किया।
"मैं अंकित सिंह बोल रहा हूँ और तुम इति को जानते हो?"
अंकित ने फोन पर पूछा और बस इतना ही काफी था ध्रुव को हाइपर करने के लिए।
"साले कुत्ते के पिल्ले दोबा गलती से भी फोन किया मुझे तो जिन्दा दफना दूँगा तुझे फोन रख शुअर की औलाद।"
ध्रुव ने उसे जी भरके गालियाँ बकी और फोन रख दिया जिसके बाद दोबारा उसकी हिम्मत नहीं हुई कि ध्रुव को काॅल कर सके।
अगले दिन तक धीरे-धीरे सबको पता चल चुका था कि बीते दिनों में उसके साथ क्या-क्या हुआ था और सब उसके काम से बहुत प्रभावित नजर आ रहे थे।
बहरहाल इन सबके बाद पहली बार ध्रुव खुद को आजाद और रिलैक्स महसूस कर रहा था और अगले पेपर में उसने पचास में पचास अंको के क्वेश्चन सही किये यही नहीं उससे प्रभावित होकार जय ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।
जय और ध्रुव को यकीन था कि अंशिका और इति उनके जिंदगी का सबसे बुरा वक्त थीं जो अब खत्म हो चुका था पर कहते हैं न कि बुरा वक्त जाते-जाते भी अपने पीछे निशानियाँ छोड़ जाता है।
यही उन लोगों के साथ भी हुआ।
प्रद्युम्न वीर विनीत रोहित विराट गौतम और ऐसे ध्रुव के कई दोस्त जय से सिर्फ इसलिए नाराज हो गए थे क्योंकि उसने पेपर में किसी को अपने जवाब काॅपी करने नहीं दिया।
ध्रुव प्रद्युम्न के साथ-साथ उन लोगों को समझाते-समझाते थक गया कि अगर जय ने ऐसा किया भी तो ठीक ही किया था बहरहाल उसकी कोई मजबूरी रही होगी जैसे के समय की पाबंदी या टीचरों की गार्डी क्योंकि एक ही कमरे में चार टीचर गार्डी करते थे ऐसे में जय की बात तो दूर खुद ध्रुव भी मानता था कि अगर वह जय की जगह होता तो शायद वह भी यही करता।
उसने उन्हें लाख बार समझाने की कोशिश की मगर उन्हें न समझना था न ही वे समझे बल्कि उन्होंनें तो ध्रुव को भी जय से अलग होने को कह दिया लेकिन ध्रुव का निश्चय अटल था और उसने उनके बजाए जय को चुना क्योंकि वे गलत थे और जय सही।
"वक्त के साथ-साथ वे सब समझ जायेंगे।"
रिजल्ट देखने जाते समय ध्रुव ने जय से कहा इति से रिश्ता तोड़े तीन महीने हो चुके थे इस बीच न ध्रुव ने उसे फोन किया और न ही उसने ध्रुव से कांटेक्ट करने की कोई कोशिश की।
"कोई फर्क नहीं पड़ता मुझे जब तक कि तुम जैसा दोस्त मेरे साथ है।"
जय ने गम्भीरता से जवाब दिया।
"हमेशा रहूँगा।"
ध्रुव ने भर्राये हुए आवाज में उसे आश्वासन दिया और रिजल्ट देखते ही दोनों उछल पड़े उन दोनों के ही बहुत बढ़िया नम्बर थे हालांकि उनका अंदाजा सही निकला और वो ये कि शोभित ने टाॅप किया था जबकि अरविंद और आदित्य दूसरे और तीसरे पोजिशन पर थे।
वहीं प्रद्युम्न और उसके ग्रुप के बाकी लड़कों ने उन दोनों को देखकर नजरें फेर लीं बहरहाल ध्रुव ने अच्छे नम्बर लाने के लिए उन सबको बधाई दी।
इसी बीच अमित प्रतीक देवांश आकर्षित उत्कर्ष और मोहन के साथ-साथ रजत भी भागते हुए उनके करीब आ गए और सब खुशी-खुशी एक दूसरे को अपना रिजल्ट दिखाने लगे।
ध्रुव खुश था और जय भी।
"क्या हुआ ध्रुव भाई रो क्यों रहे हो?"
अमित ने उसके करीब आते हुए पूछा।
"अर... कुछ नहीं आँख में कुछ पड़ गया था।"
ध्रुव ने जल्दी से बहाना बनाते हुए कहा पर अमित इतना भी बेवकूफ नहीं था।वो समझ गया था कि भले ही ध्रुव ऊपर से खुश दिख रहा हो मगर अंदर ही अंदर इति से जुड़ी अच्छी-बुरी यादें उसे बहुत कचोट रही थीं पर अमित इस वक्त उसके बारे में बात नहीं करना चाहता था इसलिए खामोश रह गया।
अचानक जैसे ध्रुव को कुछ याद आया।
"अर.... उस दिन जब मैंनें विनीत को मिला लव लैटर सर को दिखा दिया था और उस लड़की को डाँट खिलाया था तो तू भड़क क्यों गया था?"
"अर.. वो उस दिन मैं थोड़ा अपसेट था।"
अमित ने उसकी बात हवा में उड़ाने की कोशिश की।
"क्यों?"
ध्रुव ने गम्भीर स्वर में पूछा बहरहाल पहले तो अमित ने चारों ओर नजरें दौड़ाई और जब देखा की दूर-दूर तक और कोई वहाँ नहीं था तो उसने ध्रुव को अपने दिल की बात बताई।
"अर... उस दिन मैंनें भी दीप्ति को प्रपोज किया था पर उसने कहा कि वो किसी और से प्यार करती थी किसी संतोष नाम के लड़के से!"
अमित ने उसे सच्चाई बताई।
"प्यार को खोने का दर्द मैं जानता हूँ इसलिए जब उस दिन तुम सबने उस लड़की के लव लेटर का मजाक बनाया तो मुझे गुस्सा आ गया खैर कोई बात नहीं जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती।"
कहाने के साथ ही वो मुड़कर भीड़ में गुम हो गया जबकि हैरान और बेबस खड़ा ध्रुव प्यार के एक और अधूरे पन्ने को दुनिया की किताब में गुम होते देख रहा था।अमित के लिए उसके दिल में सहानुभूति की लहर उमड़ रही थी क्योंकि ध्रुव के पास तो जय था जिसके साथ वो अपना हर दुख-दर्द बाँट लेता था पर अमित हमेशा अपने राज अपने सीने में दबाए रखता था और दुनिया वालों को हँसता मुस्कुराता ही दिखता था।
ध्रुव को आज तक समझ में नहीं आया था कि आखिर इति को उसे धोखा देकर क्या हासिल हुआ पर इसका जवाब कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा था।
"अमित ने सही कहा था दुनिया यहीं खत्म नहीं होती।"
जय और ध्रुव एक दूसरे के कंधे पर हाथ डाले हुए चल पड़े एक नई राह पर किसी नये मंजिल की ओर....
"भाई वो देख क्या लड़की है!"
जय ने उत्साह के साथ सामने की ओर इशारा किया और अपने घर का रास्ता छोड़कर दोनों उसके पीछे चल पड़े एक नये हमसफर की तलाश में क्योंकि जिंदगी का एक लम्बा सफर तय करना था उन्हें और बिना किसी हमसफर के यह मुश्किल होता।
ये दुनिया कहानियों का एक अकूत भंडार है,
यहां हर रोज एक नयी कहानी जन्म लेती है,
किरदार नये होते हैं,
जगह नयी होती है,
कहानी नयी होती है,
लेकिन कुछ कहानियाँ अधूरी ही रह जाती हैं ऐसी ही ये एक कहानी थी अधूरी....
ध्रुव और इति की अधूरी कहानी....
जय और अंशिका की अधूरी कहानी....
प्रतीक और गुंजन की अधूरी कहानी....
इश्क़ और दोस्ती की अधूरी कहानी....
कभी ना खत्म होने वाला अधूरापन.....
ध्रुव की जिंदगी के अधूरे पन्ने.....
                    It’s Not End Yet

                                     Written By
                          Manish Pandey’Rudra’

©manish/pandey/12-03-2018

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